छावला गैंग रेप केस 
: देश की बेटी किरन नेगी के साथ बलात्कार के बाद निर्मम हत्या केस में निचली अदालत और उच्च न्यायालय (High Court) से फांसी की सजा पाए तीनों अभियक्तों को उच्चतम न्यायालय द्वारा संदेह का लाभ देकर बाइज्जत बरी करने के फैसले से देशभर में आक्रोश है।  इस आक्रोश की बानगी आज सुप्रीम कोर्ट के बाहर भी दिखी जहां लोगों ने इस फैसले से आहत होकर धरना प्रदर्शन व चक्का जाम किया।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि पिछले 10 सालो से एक गरीब माता पिता अपनी मृतक बेटी को न्याय दिलाने के लिए न्याय के मंदिर में चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उच्चतम न्यायालय के फैसले ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दी । हताश निराश पूरी तरह से टूट चुके माता पिता ने कहा कि  उनकी बेटी की एक बार फिर से हत्या की गई है ।


निचली अदालत और हाई कोर्ट के फांसी के फैसले को बदलकर सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही न्याय व्यवस्था पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। इससे देश में लोग सवाल कर रहे हैं कि विभत्स व निर्मम हत्या करने वाले दरिंदो को इसी तरह छोड़ा गया तो फिर बहन बेटियों की रक्षा कौन करेगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला न बदला तो इस समाज में बेटियों और स्त्रियों की अस्मिता लूटने और हत्या करने वालो का दुःसाहस बढ़ता चला जायेगा और ऐसी कुंठित मानसिकता से उपजी दरिंदगी को कुचलना नामुमकिन हो जायगा ।

बेटी को न्याय दिलाने के लिए किए गए प्रदर्शन में लोगों ने कोर्ट से दरिंदो की सजा पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। प्रदर्शन करने वालों में कुसुम कंडवाल भट्ट, प्रेमा धोनी, रोशनी चमोली, दीपा चतुर्वेदी, लक्ष्मी नेगी, दीपिका नयाल, किरण लखेड़ा, दीपू भाकुनी सहित अन्य अनेकों महिला पुरुषों ने भाग लिया ।




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