किमोली लक्ष्मी नारायण मेले में दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ करतीं मुख्य अतिथिकिमोली लक्ष्मी नारायण मेला 2026 : दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, लोक भजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भक्तिमय हुआ माहौल

किमोली लक्ष्मी नारायण मेला कर्णप्रयाग : जनपद के कर्णप्रयाग ब्लॉक के अंतर्गत सीमांत क्षेत्र किमोली में आयोजित ‘श्रीलक्ष्मी नारायण धार्मिक, पर्यटन, सांस्कृतिक एवं विकास मेले’ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं और दर्शकों का खासा उत्साह देखने को मिला। मेले के दूसरे दिन क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान लक्ष्मी नारायण के दर्शन कर मन्नतें मांगी। इस दौरान पूरा मेला क्षेत्र भगवान के जयकारों से गुंजायमान रहा। किमोली लक्ष्मी नारायण मेला न केवल क्षेत्र की धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह स्थानीय लोक संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख दीपिका मैखुरी ने किया शुभारंभ

मेले के दूसरे दिन के मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कर्णप्रयाग की ब्लॉक प्रमुख दीपिका मैखुरी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर अपने संबोधन में ब्लॉक प्रमुख ने कहा कि हमारे पहाड़ी क्षेत्रों के ये पारंपरिक मेले हमारी थाती और संस्कृति के संवाहक हैं। किमोली लक्ष्मी नारायण मेला जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का बेहतरीन माध्यम हैं। उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए मेला समिति और स्थानीय जनता को बधाई दी और क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

धनशारी गांव से पहुंची भगवान की डोली, जयकारों से गूंजा परिसर

किमोली लक्ष्मी नारायण मेला का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीलक्ष्मी नारायण की देव डोली का आगमन रहा। धनशारी गांव से पूरे विधि-विधान और पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ढोल-दमौ) की थाप के साथ भगवान श्रीलक्ष्मी नारायण की भव्य डोली मंदिर परिसर में पहुंची। जैसे ही डोली ने मंदिर प्रांगण में प्रवेश किया, वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान का स्वागत किया। पूरा परिसर “जय लक्ष्मी नारायण” और “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने डोली के आगे शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

किशन दानू के भजनों और महिला मंगल दलों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

किमोली लक्ष्मी नारायण मेला के सांस्कृतिक मंच पर उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार किशन दानू ने अपनी सुरीली आवाज से समां बांध दिया। उनके गाए भक्तिमय भजनों और लोकगीतों पर दर्शक और श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए। इसके साथ ही, किमोली और डिडोली गांव के महिला मंगल दलों द्वारा प्रस्तुत किए गए पारंपरिक मांगल, जागर और भजनों ने पूरे माहौल को पूरी तरह से आध्यात्मिक और भक्तिमय बना दिया। महिलाओं द्वारा गाए गए इन पौराणिक थड़िया-चौंफला और सांस्कृतिक गीतों ने देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

स्कूली बच्चों के रंगारंग कार्यक्रमों ने मोहा मन

धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मेले में स्थानीय स्कूली बच्चों ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विभिन्न स्कूलों से आए छात्र-छात्राओं ने उत्तराखंडी लोक नृत्यों, देशभक्ति गीतों और सामाजिक संदेशों पर आधारित नाटकों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। बच्चों की इन मनमोहक और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद दर्शकों का दिल जीत लिया और पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

स्थानीय उत्पादों और विकास प्रदर्शनी का केंद्र बना मेला

धार्मिक और सांस्कृतिक उल्लास के बीच इस मेले में स्थानीय विकास और पर्यटन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। मेले में विभिन्न सरकारी विभागों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा विकास प्रदर्शनियां और स्टॉल लगाए गए हैं। यहाँ स्थानीय काश्तकारों द्वारा उत्पादित जैविक दालें, जड़ी-बूटियाँ और हस्तशिल्प के उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। किमोली लक्ष्मी नारायण मेला क्षेत्र के आर्थिक विकास और ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा देने का एक सशक्त मंच साबित हो रहा है। इस दौरान मेला समिति के पदाधिकारी, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और भारी संख्या में क्षेत्रीय जनता मौजूद रही।