नई दिल्ली, 26 सितंबर 2026: देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में एक गरिमामयी और सादगीपूर्ण साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। अवसर था हिंदी और गढ़वाली भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार रमेश चंद्र घिल्डियाल ‘सरस’ के नवीनतम हिंदी कविता संग्रह ‘पलकों के पार सागर’ के भव्य लोकार्पण का। इस ऐतिहासिक साहित्यिक क्षण का गवाह बनने के लिए उत्तराखंड और दिल्ली के कई वरिष्ठ साहित्यकार, लेखक और कलाकार एकजुट हुए।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यह लोकार्पण समारोह सुप्रसिद्ध लोक गायिका और कवयित्री डॉ. कुसुम भट्ट के रोहिणी स्थित निवास पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों ने श्री घिल्डियाल के साहित्य सृजन और भाषा के प्रति उनके समर्पण की जमकर सराहना की।
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं ‘सरस’
रमेश चंद्र घिल्डियाल ‘सरस’ हिंदी और गढ़वाली साहित्य जगत में एक जाना-माना नाम हैं। वे केवल कविताएं ही नहीं लिखते, बल्कि गद्य और पद्य दोनों विधाओं पर उनकी समान पकड़ है। अब तक उनके एक दर्जन से अधिक ऐतिहासिक व सामाजिक उपन्यास और पुस्तकें हिंदी तथा गढ़वाली भाषा में प्रकाशित होकर पाठकों के बीच अपनी खास पहचान बना चुकी हैं। साहित्यिक गलियारों में मुख्य रूप से एक सशक्त उपन्यासकार के रूप में रमेश चंद्र घिल्डियाल ‘सरस’ जी को विशेष ख्याति प्राप्त है। उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल समाज को नई दिशा दी है, बल्कि उत्तराखंड की लोक-संस्कृति और भाषा को भी वैश्विक पटल पर समृद्ध किया है। साहित्य के क्षेत्र में उनके इसी अनवरत और अमूल्य योगदान के लिए उन्हें समय-समय पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों और पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
निरंतर सक्रियता और संगठनात्मक नेतृत्व
70 से अधिक की आयु में भी रमेश चंद्र घिल्डियाल ‘सरस’ जी लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। लेखन के साथ-साथ वे सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों को भी अपना कुशल नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में वे गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में यह संस्था हर साल कम से कम दो बड़े साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों का सफल संपादन करती है, जिससे नए रचनाकारों को एक मजबूत मंच मिलता है। इसके अतिरिक्त, वे उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संरक्षक मंडल के सम्मानित सदस्य भी हैं, जहां से वे प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी जड़ों और मातृभाषा से जोड़ने का महती कार्य कर रहे हैं।
‘पलकों के पार सागर’: जीवन के विविध रंगों का अनूठा संग्रह
लोकार्पित पुस्तक ‘पलकों के पार सागर’ मूल रूप से एक हिंदी काव्य पुस्तक है, लेकिन इसकी व्यापकता बेहद गहरी है। इस कृति की विशेषता यह है कि इसमें केवल कविताएं ही नहीं, बल्कि मधुर गीत और मर्मस्पर्शी गजलें भी शामिल हैं। लेखक ने अपनी इस अनूठी कृति ‘पलकों के पार सागर’ में मानव जीवन के हर झंझावात, सुख-दुख, प्रेम, विरह, सामाजिक परिवेश और आत्मिक भावों को बेहद खूबसूरती से सहेजा है।
इस पुस्तक का प्रकाशन गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान द्वारा किया गया है और इसका मुद्रण लखेड़ा प्रिंटिंग प्रेस के माध्यम से हुआ है। लगभग 62 पृष्ठों के इस कविता संग्रह की प्रत्येक रचना सीधे पाठक के दिल को छूती है। पुस्तक का हर पन्ना, हर छंद और हर अंतरा रमेश चंद्र घिल्डियाल ‘सरस’ जी के गहरे मनोभावों, उनके जीवन के अनुभवों और उनकी दार्शनिक सोच को पूरी प्रामाणिकता के साथ व्यक्त करता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को बनाया यादगार
सादगी से सजे इस लोकार्पण समारोह में साहित्य जगत के कई चमकते सितारे मौजूद रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार सर्वश्री गिरीश बिष्ट ‘हंसमुख’ (सपत्नीक), जयपाल सिंह रावत (छयपड़ दा), सुशील बुड़ाकोटी, जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’, दिनेश ध्यानी, प्रदीप रावत ‘खुदेड़’, वीरेंद्र जुयाल ‘उपरि’, डॉ. कुसुम भट्ट, पीयूष कुमार और प्रसिद्ध लोक गायक राकेश गुसाईं सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
समारोह के दौरान उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों ने पुस्तक की समीक्षा की और रमेश चंद्र घिल्डियाल ‘सरस’ जी की चुनिंदा कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण तब बना जब गृह स्वामिनी डॉ. कुसुम भट्ट और सुप्रसिद्ध लोक गायक राकेश गुसाईं ने अपनी सुरीली आवाज में पुस्तक ‘पलकों के पार सागर’ की गजलों और गीतों को गाकर सुनाया। उनकी इस संगीतमय प्रस्तुति ने पूरे माहौल को काव्यमय और जादुई बना दिया, जिससे यह आयोजन उपस्थित सभी लोगों के लिए हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बन गया। अंत में सभी ने लेखक को बधाई देते हुए पुस्तक की सफलता की कामना की।
