गढ़वाली कुमाऊनी ग्रीष्म कालीन शिक्षण कक्षाओं के दुर्गा विहार-देवली केंद्र में आए अतिथियों ने दिया अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश


नई दिल्ली : उत्तराखंड साहित्य मंच दिल्ली द्वारा आयोजित गढ़वाली कुमाऊनी ग्रीष्म कालीन शिक्षण कक्षाओं के दुर्गा विहार-देवली सेंटर में रविवार 29 जून को शिक्षण कक्षाओं के आठवें सत्र के साथ ही सफल समापन हुआ। इस सत्र की अंतिम कक्षा का शुभारंभ श्री हरी सिंह रावत जी वरिष्ठ पत्रकार व संपादक रिद्धि दर्पण द्वारा किया गया । इस दौरान आयोजकों द्वारा पुष्पगुच्छ और अंग वस्त्र द्वारा उनको सम्मानित किया गया।

श्री हरी सिंह रावत जी ने बच्चों को अपनी मातृभाषा के लाभ बताते हुए उन्हें गढ़वाली कुमाउनी बोली भाषा को आत्मसात करने व अपनी संस्कृति से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।

दिल्ली पुलिस की एसीपी शान्ति गोस्वामी जी ने भी शिक्षण केंद्र में शिरकत कर बच्चों व कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन कर उनका मनोबल बढ़ाया । यही नहीं उन्होंने बच्चों के लिए जलपान व अल्पाहार की व्यवस्था भी की। उन्होंने बच्चों से कहा की अन्य भाषाओं के साथ साथ अपनी मातृभाषा गढ़वाली कुमाउनी को जानना बेहद आवश्यक है । क्योंकि इसके माध्यम से आप न केवल अपनी लोक संस्कृति और साहित्य को भली भांति जान व समझ सकते हैं बल्कि अपनी जड़ों से भी जुड़े रहते हैं ।  

केंद्र के संचालक उमेश सती जो कि एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और निजता में रहकर कार्य करने में विश्वास रखते हैं, ने कहां कि उत्तराखंड साहित्य मंच द्वारा उत्तराखंड मूल के बच्चों को अपनी भाषा, अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति व खान पान से जोड़े रखने के लिए भाषा क्लासों का आयोजन सराहनीय कदम है। उन्होंने सभी अतिथियों, गुरुजनों, कार्यकर्ताओं, बच्चों और अपने केंद्र को सहयोग कर रहे सभी भाषा और संस्कृति प्रेमियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हम कक्षाओं का संचालन और भी बेहतर ढंग से करने का संकल्प लेते हैं। 

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