उत्तराखंड में विदेशी भाषा प्रशिक्षण छात्रों को देने की तैयारी। फोटो में विदेशी भाषाओं के शब्दकोशों (डिक्शनरी) का एक ढेर, जिसमें स्पेनिश, रूसी, रोमानियाई, स्लोवेनियाई और फ्रेंच भाषा की किताबें शामिल हैं।उत्तराखंड में विदेशी भाषा प्रशिक्षण: मुख्य सचिव का बड़ा फैसला, दून यूनिवर्सिटी के छात्र देंगे ट्रेनिंग

देहरादून। उत्तराखंड सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों और युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। राज्य के अटल उत्कृष्ट विद्यालयों और राजीव नवोदय विद्यालयों में अब अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य विदेशी भाषाओं को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार का पूरा ध्यान अब उत्तराखंड में विदेशी भाषा प्रशिक्षण को हर स्तर पर मजबूत करने पर है।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

व्यापक कौशल विकास के रूप में होगा विकास

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में विदेशी भाषा प्रशिक्षण को महज एक विषय के तौर पर न पढ़ाया जाए, बल्कि इसे एक व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम (Comprehensive Skill Development Program) के रूप में विकसित किया जाए। सरकार का उद्देश्य इसके माध्यम से राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए वैश्विक अवसर पैदा करना है। इस कार्यक्रम का खाका इस तरह तैयार किया जा रहा है जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को सीधा लाभ मिल सके।

इस योजना के मुख्य लाभार्थी निम्नलिखित होंगे:

  • स्कूली विद्यार्थी: शुरुआत में अटल उत्कृष्ट और राजीव नवोदय विद्यालयों के छात्र।
  • तकनीकी छात्र: आईटीआई (ITI) में कौशल विकास का प्रशिक्षण ले रहे युवा।
  • हेल्थकेयर प्रोफेशन्स: चिकित्सा और नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े युवा, ताकि वे विदेशों में रोजगार पा सकें।
  • इच्छुक नागरिक: राज्य के अन्य कोई भी व्यक्ति जो विदेशी भाषा सीखने की इच्छा रखते हैं।

हर जिले में खुलेगा केंद्र, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का मिलेगा साथ

कौशल विकास एवं सेवायोजन कार्यालय द्वारा वर्तमान में उत्तराखंड में विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल तीन जिलों तक सीमित है। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद अब इसका पूरे प्रदेश में विस्तार किया जाएगा। वर्तमान और आगामी योजना का पूरा ढांचा नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:

वर्तमान स्थिति (Current Status)आगामी विस्तार योजना (Future Roadmap)
• वर्तमान में केवल देहरादून, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों में प्रशिक्षण संचालित।• योजना को विस्तारित करते हुए प्रदेशभर (सभी 13 जिलों) में शुरू किया जाएगा।
• सिमित केंद्रों के माध्यम से संचालन।• राज्य के प्रत्येक जिले में एक विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा।
• स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे केंद्र।• कौशल विकास विभाग के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में संचालित हो रहे केंद्रों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

दून विश्वविद्यालय के छात्रों की ली जाएगी मदद, मिलेंगे ‘एकेडमिक क्रेडिट’

इस पूरी योजना को धरातल पर उतारने और शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए मुख्य सचिव ने एक अनूठा और व्यावहारिक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए दून विश्वविद्यालय (Doon University) में विदेशी भाषाओं (जैसे फ्रेंच, जर्मन, जापानी, चाइनीज आदि) की पढ़ाई कर रहे वरिष्ठ और योग्य विद्यार्थियों की सेवाएं ली जाएं।

इससे न सिर्फ स्कूली बच्चों को अच्छे ट्रेनर मिलेंगे, बल्कि सिखाने वाले विश्वविद्यालय के छात्रों को भी बड़ा फायदा होगा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उत्तराखंड में विदेशी भाषा प्रशिक्षण देने वाले इन यूनिवर्सिटी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें शैक्षणिक क्रेडिट (Academic Credits) या अन्य वित्तीय/गैर-वित्तीय प्रोत्साहन देने की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।

बैठक में रहे ये दिग्गज मौजूद

सचिवालय में संपन्न हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में शासन और शिक्षा जगत के कई बड़े चेहरे मौजूद रहे। बैठक में मुख्य रूप से सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, विनय शंकर पांडेय, ज्योति यादव और दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित कौशल विकास विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने इस योजना को तय समय सीमा के भीतर पूरे राज्य में लागू करने पर अपनी सहमति जताई है। सरकार के इस कदम से आने वाले दिनों में दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चे भी उत्तराखंड में विदेशी भाषा प्रशिक्षण पाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन कर सकेंगे।

You missed