नई दिल्ली : कथक नृत्यांगना डॉ. दीपा जोशी को (डी.लिट्.) डॉक्टर ऑफ लेटर्स की उपाधि से विभूषित किया गया। डॉ दीपा जोशी उत्तराखंड की प्रथम और भारत की दूसरी महिला कथक नृत्यांगना हैं जिन्हें कथक में डी.लिट्. की प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त करने का गौरव प्राप्त हुआ है। डॉ दीपा जोशी को यह उपाधि एशिया के प्रथम संगीत व ललित कला विश्वविद्यालय इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में आयोजित 17वें दीक्षांत समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका व कुलपति प्रो लवली शर्मा के द्वारा प्रदान की गई। डॉ दीपा जोशी अपनी इस उपलब्धि का श्रेय गुरुजनों विशेष रूप से गुरु प्रो डॉ पूर्णिमा पांडे व माता पिता को देती हैं जिन्होंने उन्हें इस कार्य के लिए प्रेरित किया।। डॉ दीपा जोशी दूरदर्शन की ‘ए-ग्रेड कथक नृत्यांगना हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!डॉ दीपा की कथक की प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा से हुई उसके उपरांत भातखंडे हिन्दुस्तानी संगीत महाविद्यालय लखनऊ , कथक केंद्र,लखनऊ, तथा इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से कथक की उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्हें कथक की उच्च शिक्षा के लिए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई थी। डॉ दीपा जोशी ने देश के कई प्रतिष्ठित मंचों मे अपनी एकल प्रस्तुति दी है । वहीं नृत्य की निरंतर साधना के साथ-साथ संगीत विषय पर अनेक महत्वपूर्ण आलेखों व पुस्तकों का लेखन कर इस शास्त्रीय कला के सैद्धांतिक पक्ष को भी समृद्ध किया है।
डॉ. जोशी देश के प्रतिष्ठित संगीत संस्थानों व विश्वविद्यालयों की परीक्षक, विश्वविद्यालयों की चयन समितियों की सदस्य व एक्सपर्ट के रूप में अपने अनुभव और विद्वता का योगदान दे रही हैं। वर्तमान में वह सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के नैनीताल कार्यालय में कार्यरत हैं।
