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शीतकाल में यमुना दर्शन : उत्तराखंड में चारधाम के कपाट बंद होते ही चारधाम यात्रा भी बंद हो जाती है। शीतकाल में अत्यधिक बर्फ पड़ने से इन स्थानों पर जाना नामुमकिन होता है लेकिन इंसान की इच्छा वहां जाने की बनी रहती हैं। यदि शीतकाल में आपका मन मां यमुना को देखने का बन रहा है तो आप उत्तरकाशी के खरसाली (खुशीमठ) जा सकते हैं। शीतकाल के दौरान मां यमुना के दर्शन आपको यहीं होंगे। यहां स्थित यमुना मंदिर में मां की भोगमूर्ति अक्षय तृतीया तक विराजमान रहती है। इस दौरान यहां चार पुरोहित विधि विधान से दैनिक पूजा, यमुना पंचांग पाठ और आरती करते हैं।
खरसाली गांव उत्तरकाशी जिले में समुद्रतल से 2500 मीटर की ऊंचाई पर यमुना नदी के तट पर स्थित है। आप यहां से बंदरपूंछ, सप्तऋषि, कालिंदी, माला व भीम थाच जैसी चोटियों के दर्शन कर सकते हैं। खूबसूरत वादियों के बीच बसा यह गांव अति रमणीय है।
शीतकाल में इसके आस पास की पहाड़ियां बर्फ से ढकी रहती है। यही नहीं जनवरी माह में खरसाली में भी काफी बर्फ़बारी होती है। यही कारण हैं कि इस दौरान पर्यटक और ग्रामीण यहां पहुँचते हैं और विहंगम दृश्यों का आनंद उठाते हैं। खरसाली गांव के लोग ही यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहित हैं।
खरसाली गांव सड़क से जुड़ा हुआ है और यमनोत्री से मात्र 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उत्तरकाशी से खरसाली दूरी लगभग 134 किमी० है। यहां यमुना मां का भव्य मंदिर है। शीतकाल में मां यहीं विराजमान होती हैं। यही कारण है कि खरसाली गांव को यमुना का मायका भी कहा जाता है।
लोक मान्यताओं के अनुसार शनि और यमुना, दोनों ही सूर्य की संतान हैं। यमुना संज्ञा की पुत्री और शनिदेव छाया के पुत्र हैं, दोनों भाई-बहन हैं। यही कारण है कि कपाट खुलते समय मां यमुना की डोली के साथ शनिदेव की डोली को भी यमनोत्री ले जाया जाता है लेकिन कपाट खुलने के बाद उसी दिन शनिदेव की डोली खरसाली गांव लौट आती है।
कहा जाता है कि खरसाली में मां यमुना और शनिदेव के दर्शन करने से मनुष्य को यम यातना से मुक्त मिल जाती है।
