माहेश्वरी देवी कुलानन्द बुड़ाकोटी स्मृति न्यास ने असंखेत इंटर कॉलेज के विकास के लिए दिया सहयोग 

पौड़ी : सामाजिक कार्यों के लिए अग्रणी माहेश्वरी देवी कुलानन्द बुड़ाकोटी स्मृति न्यास द्वारा स्वतंत्रता सेनानी घनश्याम खंतवाल इंटर कॉलेज जाख मल्ला विकास खंड ज़हरिखाल पौड़ी में एक समारोह के दौरान छात्र-छात्राओं को किताबें, कॉपी बेग, वर्दी इत्यादि के लिए मदद के तौर पर पैंतीस हजार रूपये की एक छोटी सी राशि प्रधानाचार्य श्री मदन मोहन खंतवाल को सौंपी। न्यास की तरफ से स्कूल को यह राशि दिनेश ध्यानी, आर पी चमोली, और अनिल ढौंढियाल ने  सौंपी। 

इस बावत दिनेश ध्यानी और आर पी चमोली ने बताया कि माहेश्वरी देवी कुलानन्द बुड़ाकोटी स्मृति न्यास के अध्यक्ष श्री मनमोहन बुड़ाकोटी  समय समय पर जनहित के कार्य करते रहते हैं लेकिन कुछ निजी व्यवस्थाओं के चलते वे इस आयोजन में सरीक नहीं हो सके लेकिन उन्होंने कहा की निकट भविष्य में जैसा भी संभव होगा स्कूल के विकास के लिए और मदद लेकर आएंगे। यही नहीं भविष्य में गढ़वाल ग्रुप और उत्तराखंड लोक भाषा मंच भी अपनी और से स्कूल की मदद करने का प्रयास करेंगे। 


बता दें कि माहेश्वरी देवी कुलानन्द बुड़ाकोटी स्मृति न्यास सन 2015 से साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा आदि के क्षेत्रों में सहयोग व सम्मान प्रदान कर रहा है। यही नहीं राष्ट्रीय आपदाओं मैं भी उनका सहयोग व सहभागिता बढ़चढ़ कर रहती है। 

इस मौके पर साहित्यकार दिनेश ध्यानी ने स्कूल के विद्यार्धियों को अपनी भाषा के प्रति जागरूक किया और कहा की भविष्य में आप दुनिया की कोई भी भाषा सीखें पर अपनी गढ़वाली भाषा को बिलकुल न भूलें और जब गांव में जनगणना हो तब राष्ट्र भाषा हिंदी और अपनी मातृभाषा गढ़वाली ही लिखें ऐसा करने से गढ़वाली भाषा बोलने और लिखने वालों की संख्या बढ़ेगी। 

विद्यालय के स्टाफ का कहना है कि हमारे स्कूल में बिल्डिंग बहुत ही खस्ता हाल है।  कमरों के दरवाजे व खिड़कियों के शीशे टूटे पड़े हैं, बच्चों की पुस्तकों व वर्दी के लिए सरकार की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिल रहा। इस बावत हमने स्थानीय विधायक, सांसद यहां तक कि मंत्री जी से भी अनुरोध कर लिया किंतु अभी तक कोई सहयोग नहीं मिला। 

विद्यालय के प्रधानाचार्य मदन मोहन खंतवाल ने कहा कि हमारे विद्यालय को सहयोग करने के लिए हम सब माहेश्वरी देवी कुलानन्द बुड़ाकोटी स्मृति न्यास व यहां उपस्थित अतिथियों के बहुत आभारी है और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में भी उनका सहयोग व मार्गदर्शन विद्यालय को मिलता रहेगा। साथ ही उन्होंने कहां कि हम अपेक्षा करते हैं कि उत्तराखंड सरकार भी हमारे विद्यालय की दशा व दिशा बदलने के लिए संज्ञान लेगी। 

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