गढ़वाळि साहित्य





नई दिल्ली
 : गढ़वाळी साहित्यकार श्री जगमोहन सिंह रावत जगमोरा कि पांच सौ पजल पूरि होण परैं उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का तत्वाधान म डीपीएमआई सभागार, न्यू अशोक नगर, दिल्ली म एक समारोह कु आयोजन करेगे। ये मौका परैं कै साहित्यकारों न शिरकत कैरि। श्री जगमोहन सिंह रावत जगमोरा न बोलि कि मि गढ़वाळि भाषा 
म पजल का माध्यम से ने विधा परैं काम करणों छौं अर यांम कै कमी ह्वै सकदीं । वों न बोलि कि मि आप साहित्यकार लोगों से अपील करदु कि हम सबुतैं यां का खातिर बगत-बगत परैं चर्चा करण चैंद कि य विधा कनम अगनै बढलि। ये मौका परैं वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुशील बुडाकोटी न बोलि कि पजल विधा गढ़वाळी भाषा साहित्य म वेशक नै चा पण एक समय म गजल बि ता नै विधा रै होली इलै हमतैं पजल विधा तैं स्वीकार करण चैंद अर वै म चर्चा अर विचारविमर्श की गुंजेस सदन्नि रैण चैंद अर हूण चैंद। गजलकार श्री पयाश पोखड़ा न बोलि कि जगमोरा जी तैं पजल की परिभाषा भाषा विज्ञान का धरातल परैं बताण चैंद अर कतगै दौं वोंकि पजल उत्तरी धु्रब बिटिन सडम दक्षिणी धु्रव तक पौंछि जंदन ता पजल म क्वी न क्वी साम्यता अर भाव, सन्दर्भ का आधार परैं एकरूपता हूण चैंद। श्री जयपाल सिंह रावत छिप्वडुदा न बोलि कि जब क्वी नै विधा समणि औंद ता हम सबुतैं वै परैं सकारात्मक विचार करण चैंद।  श्री दीनदयाल बन्दूणी न बोलि कि पजल विधा परैं काम कन वळा साहित्यकार जगमोरा जी बधै का पात्र छन। वोंन पांच सौ पजल परैं अपणि एक कविता बि सुणै। दिल्ली पुलिस का पूर्व एसीपी श्री सुरेश जखमोला न बोलि कि क्वी बि विधा साहित्य की श्रीवृद्धि करदा ता पजल विधा बि अगनै समाज व साहित्य तैं पुष्ट कारलि। वोंन बोलि कि साहित्य अर भाषा का क्षेत्र म काम करण खुणि हम सदन्नि समाज तैं सहयोग कना खातिर तैयार छां। श्री चन्दन प्रेमी न बोलि कि पजल विधा बि हमरि भाषा कि एक भौत सशक्त विधा का रूपम पछ्याण बणणीं चा अर यांका हकदार श्री जगमोहन सिंह रावत जगमोरा छन। डॉ बिहारी लाल जलन्धरी न बोलि कि पजल विधा म श्री जगमोरा जी की साहित्य सेवा नै विधा तैं आकार देणीं चा। वोंन बोलि कि हम उत्तराखण्डी भाषा बणण लग्यां छंवा साहित्यकारों तैं सहयोग करण चैंद। श्री बृजमोहन वेदवाल न बोलि कि श्री जगमोरा जी पजल विधा परैं बढिया काम करणां छन हम तैं वोंकु सहयोग करण चैंद। एक व्यक्ति लगातार दिनरात साहित्य सृजन करणों चा ता हम लोगों तैं बिना बाता अडंगा नि  लगाण चंदन। हां कखि क्वी कमि बेसी होता चर्चा जरूरी छा।

डीपीएमआई का चेयरमैन, वरिष्ठ समाजसेवी अर उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली का संरक्षक डॉ विनोद बछेती न बोलि कि हमरि गढ़वाळी अर कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर लगातार जतन हूण लग्यां छन। मि अनुरोध करदु कि उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली का तत्वाधान म दिल्ली एनसीआर म लगातार भाषाई आयोजन अर पुस्तक मेला कु आयोजन हूण चैंद अर नै पीढी तैं व समाज का हर वर्ग तैं यों आयोजनों म ज्वडण चैंद ताकि साहित्य हमरा घरों म पौंछ। वोंन बोलि कि मि अमणि उद्यम या राजनीति म अगर कखि खडु छौं ता वै म म्यारू समाज कु भौत बडु योगदान चा। डॉ बछेती न बोलि कि हमुन सन 2012 बिटिन आदरणीय श्री दिनेश ध्यानी जी कि पहल परैं महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल साहित्य सम्मान से ज्व भाषा यात्रा शुरू कैरि छै व अमणि दिल्ली एनसीआर समेत उत्तराखण्ड म गढ़वाळि, कुमाउनी कक्षाओं का रूपम अगनै बढणीं चा अर हमुन ये साल लगभग इकतालीस भाषा शिक्षण केन्द्रों कु संचालन कैरि ता य हमरा समाज कि ताकत चा। 




कार्यक्रम कु संचालन करदा उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली का संयोजक श्री दिनेश ध्यानी न बोलि कि श्री जगमोहन सिंह रावत पिछला चार साल बिटिन गढ़वाळी भाषा म साहित्य सृजन करणां छन अर लगातार पजल का माध्यम से साहित्य सेवा कना छन। ह्वै सकदा कि पजल विधा म क्वी कमि बेसि हो पण यां का खातिर बगत-बगत परैं चर्चा अर विचार विमर्श अर भाषाई आधार परैं विचार गोष्ठियों कु आयोजन हूण चैंद। वोंन बोलिे कि साहित्यकार तैं बि अपणि विधा तैं समाज का समणि विचार अर तर्कसंगत चर्चा का वास्ता प्रस्तुत करण चैंद। कै बि विधा परै चर्चा हूण चैंद अर अगर क्वी कमी छन ता वों तैं दूर करेजाण चैंद। यां म कै बि प्रकार से व्यक्तिगत विद्धेष अर खुन्नस साहित्य खुणि उचित नी। श्री ध्यानी ल बोलि कि गढ़वाळी अर कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर हम लोगों तैं अगनै हौरि तेजी से काम करण चैंद। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करदा वरिष्ठ साहित्यकार श्री रमेश चंद्र घिल्डियाल न बोलि की श्री जगमोरा जी लगातार उत्कृष्ट साहित्य सृजन कना छन। वोंकि पजल विधा परैं संशय नी च पण साहित्य विरादरी म विचार विमर्श हूण चैंद अर क्वी शंका हो तो वैकु निराकरण जरुर हूण चैंद। श्री घिल्डियाल न बोलि यना आयोजन भाषा साहित्य तैं हौरि पुष्ट करदन।

ये अवसर परैं वक्ताओं का अतिरिक्त कै साहित्यकार, समाजसेवी अर बुद्धिजीवियों न शिरकत कैरि जौंम प्रमुख श्री अनिल पन्त, प्रदीप रावत खुदेड, श्रीमती निर्मला नेगी, श्री ओम ध्यानी, श्री दीपक शर्मा, श्री सतीश रावत, श्री शिवचरण सिंह रावत, श्री सुरेन्द्र सिंह रावत, श्री सत्येन्द्र सिंह रावत, श्री दीवान सिंह नेगी, श्री जबर सिंह कैंतुरा, श्री ओम प्रकाश आर्य, श्री नीरज बवाडी, श्री गिरधारी सिंह रावत, श्री युगराज सिंह रावत, श्री भुवन रावत, श्री हरि सेमवाल, श्री ओम प्रकाश पोखरियाल, श्री गोविन्द राम पोखरियाल साथी, लोक गायक श्री मुकेश कठैत, श्री बृजमोहन सिंह नेगी, सुश्री आशा भण्डारी, श्रीमती मीना देवी पोखरियाल, श्री विनेश पोखरियाल, श्री शशि बडोला, श्री सन्दीप गढ़वाली, श्री इन्द्र सिंह रावत, श्री सन्तोष कुमार आदि लोगोंन भाग ल्हे। 

कार्यक्रम म केक काटिकि श्री जगमोहन सिंह रावत जगमोरा की पांच सौ पजलों कु उत्सव केक कटिंग का उत्सव से मनये गे। डीपीएआई कि गढ़वाळि, कुमाउनी कक्षाओं क छात्र-छात्राओं न गढ़वाळि गीतों परैं संगीतात्मक नाट्य प्रस्तुति बि देन। कुल मिलैकि यु आयोजन भाषा साहित्य कि नै विधा पजल परैं केन्द्रित छौ अर गढवाली, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर बि सब्यों न सरकार से मांग कैरि अर भविष्य म यीं दिशा म हौरि तेजी से काम करणा संकल्प दोहरै।

रिपोर्ट दिनेश ध्यानी




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