उत्तराखंड :  निकाय चुनाव में गढ़वाली भाषा बनी प्रचार का माध्यम





देहरादून:
निकाय चुनावों के लिए अब दो दिन का समय बचा है ऐसे में प्रत्याशियों का प्रचार भी चरम पर पहुंच गया है। मतदाताओं को लुभाने के लिए वो हर हथकंडे अपनाते दिख रहे हैं। वे न केवल पैदल चलकर बल्कि मतदाताओं तक अधिक से अधिक पहुँचने के लिए सोशल मीडिया का जमकर उपयोग कर रहे हैं। 
प्रचार के लिए हर कोई अपने अलग-अलग तरीके अख्तियार कर रहा है। गढ़वाल के अंदर प्रचार में इस बार एक ख़ास बात ये देखने को मिल रही है कि अधिकांश प्रत्याशियों ने गढ़वाली में बैनर और पोस्टर छपवाए हैं, जो मतदाताओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसे  गढ़वाली भाषा के लिए भी अहम कदम माना जा रहा है। 




प्रत्येक गांव नगर में प्रत्याशियों के समर्थक प्रचार में कोई कोर कसार नहीं छोड़ रहे हैं और दीवारें और घर की छतें अपने अपने प्रत्याशियों के बैनर, पोस्टर और झंडे से रंग दी है। 21 जनवरी की शाम को प्रचार का शोर थम जाएगा जिसे देखते हुए पहाड़ में हर तरफ पहाड़ियां प्रत्याशियों के हक़ में बज रहे 
गढ़वाली गीतों से गुंजायमान है। वहीं प्रत्याशी नुकड्ड सभाएं कर गढ़वाली में भाषण देकर व मंच में गढ़वाली कवियों को बुलाकर अधिक से अधिक मतदाताओं के दिलों तक पहुँचने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय भाषा में छपे पोस्टर और बैनर लोगों के बीच आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। इससे गढ़वाली भाषा अस्तित्व में आती दिखने लगी है। 

अब जब प्रचार के लिए समय बहुत ही कम बचा है तो ऐसे में हर प्रत्याशी सोशल मीडिया से अपने लिए वोट की अपील कर रहा है। वे अपने हर पल के प्रचार की गतिविधियों को सोशल मीडिया पर शेयर कर खुद को जनता का हितैषी बताकर उसके पक्ष में मतदान के लिए लोगों को लुभा रहा है। 




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