मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद थूक जेहाद वालों पर LIU रखेगी नज़र डीजीपी ने जारी किए निर्देश





देहरादून :
उत्तराखंड में होटल, ढाबों में खाद्य पदार्थों में थूकने की आये दिन होती घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सख्त नज़र आये । उन्होंने इस पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस को अलर्ट किया है। 

DGP  अभिनव कुमार ने भी  ऐसी घटनाओं को नाकाबिले बर्दाश्त मानते हुए सख्त कार्रवाई के लिए गाइडलाइन जारी कर सभी जनपदों के पुलिस कप्तानों को ऐसी घटनाओं में तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करने को कहा है। यही नहीं रेहड़ी-खोखे आदि पर होने वाली घटनाओं के संबंध में LIU को भी सक्रिय रहने के लिए कहा गया है। DGP अभिनव कुमार ने मंगलवार को निर्देश जारी कर कहा कि हाल के दिनों होटल, रेहड़ी आदि पर खाद्य पदार्थों में थूकने के वीडियो वायरल हो रहे थे।

मसूरी में हुए एक मामले में देहरादून पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। ऐसी घटनाओं का सीधा ताल्लुक वैसे तो स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा विभाग से है, लेकिन ऐसे मामलों में कई सामाजिक संगठनों के विरोध की बात भी सामने आती है। लिहाजा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस भी इस तरह के मामलों में मुकदमा दर्ज कर सकती है। ऐसे में पुलिस को अपने इलाकों में ऐसी सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत है।

यह गाइडलाइन हुई जारी



  • होटल/ढाबा आदि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत व्यक्तियों का शत-प्रतिशत सत्यापन किया जाये।
  • इस प्रकार के व्यवसायिक संस्थानों में स्थित रसोईघरों में भी सीसीटीवी कैमरा लगाने हेतु व्यवसाय प्रबंधकों को प्रोत्साहित किया जाये।
  • खोखा/रेहड़ी आदि खुले स्थानों में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने हेतु स्थानीय अभिसूचना इकाई की भी मदद ली जाए।
  • गश्त एवं पैट्रोलिंग के समय भी इसका विशेष ध्यान रखा जाये।
  • आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य एवं खाद्य विभाग से संपर्क कर होटल, ढाबा आदि प्रतिष्ठानों में randomly चेकिंग की जाये।
  • इस प्रकार की अवैध गतिविधियां पाये जाने पर धारा 274 BNS एवं 81 उत्तराखंड पुलिस एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया जाए।
  • यदि प्रश्नगत कृत्य से धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो तो नियमानुसार BNS की सुसंगत धारा 196 (1) (बी) अथवा 299 के अंतर्गत भी कार्रवाई की जाये।
  • स्वास्थ्य एवं खाद्य विभाग, नगर निगम/जिला पंचायत, नगर परिषदों तथा स्थानीय व्यक्तियों से समन्वय कर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।




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