उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली पांच और वानस्पतियां असुरक्षित सूचि में हुई शामिल 

देहरादून :- उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अनेकों उपयोगी व गुणकारी वानस्पतियां विराजमान हैं जो मनुष्य जीवन के लिए अति उपयोगी है किंतु पहाड़ों में प्रत्येक वर्ष अग्नि दोहन  के कारण ये वनस्पतियां नष्ट होने के कगार पर है अनियंत्रित दोहन के कारण पहले ही कई वानस्पतिक प्रजातियां लुप्त हो गई है और अब अतिमहत्वपूर्ण पांच प्रजातियां खतरे की जद में आ गई है जिसे देखते हुए वन विभाग के अनुसंधान वृत्त ने इन वानस्पतिक प्रजातियों को भी संकटापन्न श्रेणी में शामिल करने की संस्तुति की है। इस बारे में उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड को प्रस्ताव भी भेज दिया गया है।


इससे पूर्व उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड राज्य में पाई जाने वाली 16 वानस्पतिक प्रजातियों को संकटापन्न सूची में अधिसूचित कर चुका है। इनमें से 15 प्रजातियों को वन विभाग के अनुसंधान वृत्त ने प्रदेशभर में विभिन्न स्थानों पर नर्सरियों में संरक्षित करने में कामयाबी हासिल की है। वानस्पतियों को अब रोजगार के दृष्टि से देखा जा रहा है जिसके लिए बोर्ड लगातार प्रयासरत है।  प्राप्त जानकारी के मुताबिक मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान वृत्त संजीव चतुर्वेदी के अनुसार पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान यह बात सामने आई कि अब फिर से पांच वानस्पतिक प्रजातियां भी खतरे की जद में आ गई है। लगभग 2200 से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर पाई जाने वाली काकोली, क्षीरकाकोली, सालम पंजा, बालछड़ी व लेडीज स्लीपर नाम की वनस्पतियां मानवीय हस्तक्षेप, अनियंत्रित दोहन और इनके संरक्षण की अनदेखी जैसे कारणों से विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई हैं। इनमें लेडीज स्लीपर आर्किड है, जबकि शेष औषधीय महत्व की वनस्पतियां। उन्होंने कहा कि इन प्रजातियों के संकटापन्न श्रेणी में शामिल होने के बाद विभिन्न स्तर पर इनके संरक्षण के लिए कदम उठाए जा सकेंगे।


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