धारी देवी मंदिर





Dhari Devi Mandir :
 
करीब 9 साल के लंबे इंतजार के बाद देवभूमि की रक्षक माँ धारी देवी अपने मूल स्थान पर विराजमान होंगी। माँ धारी देवी की मूर्ति को स्थापित करने से पूर्व मंदिर समिति द्वारा विशेष पूजा अर्चना के साथ शतचंडी यज्ञ का शुभारंभ किया गया। 

24 जनवरी से 28 जनवरी तक 21 पंडितों की ओर से मूर्ति को निर्विघ्न नए मंदिर में स्थापित करने के लिए चार दिनों तक शतचंडी यज्ञ किया जा रहा है। जिसके बाद 28 जनवरी को शुभ मुहूर्त में माँ धारी देवी सहित अन्य प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा कर नवनिर्मित मंदिर में स्थापित किया जाएगा। प्राण-प्रतिष्ठा एवं मूर्ति स्थापना के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत प्रदेश के दिग्गज नेताओं और शीर्ष पुजारियों को आमंत्रित किया गया है। 




मंगलवार को प्रातः9.30 बजे से शतचंडी यज्ञ विधि विधान के साथ शुरू हुआ। 28 जनवरी को शुभ मुहूर्त में माँ धारी देवी सहित अन्य प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा कर नवनिर्मित मंदिर में स्थापित किया जाएगा।  पुजारी न्यास के सचिव जगदंबा प्रसाद पांडेय ने बताया कि मंदिर के शुद्धिकरण और माता को प्रसन्न करने के लिए यहां शत चंडी यज्ञ, रूद्राभिषेक सहित 10 महाविधाओं का पाठ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मूर्ति स्थापना के बाद भक्तों के लिए मंदिर को सुबह 9:30 के बाद  खोल दिया जाएगा।I

बता दें कि श्रीनगर से करीब 13 किलोमीटर दूर कलियासौड़ में अलकनंदा नदी के किनारे सिद्धपीठ माँ धारी देवी का मंदिर स्थित था। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के निर्माण के बाद यह मंदिर डूब क्षेत्र में आ गया।  जिसके कारण सन 2013 में माँ धारी देवी की प्रतिमा को मूल स्थान से दूसरी जगह लाया गया। इस प्रक्रिया में उत्तराखंड को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा। कहा जाता है कि इसी के चलते 16 जून 2013 को केदारनाथ में भारी विनाशकारी आपदा आई थी। 




केदारनाथ जलप्रलय के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से मंदिर की सभी प्रतिमाओं को अपलिफ्ट कर दिया गया। जिसके बाद पिछले नौ साल से प्रतिमाएं इसी अस्थायी मंदिर में विराजमान हैं। 

 







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