सती लोगों का देवस्थान और नागनाथ पोखरी उत्तराखंड के नियायत शुरुआती बसावट के गांव हैं। जब उत्तराखंड में नाममात्र की बसावट रही होगी। सती लोगों के गांव देवस्थान की प्रत्यक्ष भौगोलिक स्थिति ही इसे महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है। इसके समीप उत्तर भारत के एकमात्र कार्तिकेय मंदिर ,नागपुरगढ़ी और विनायक धार जैसे नाम स्थलों का होना और देवस्थान में सती लोगों की उपस्थिति इसे उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण परमब्रह्मण कार्तिकेतपुरम साम्राज्य के अभिन्न रूप से जोड़ती है देवस्थान ग्राम का मंदिर भी उत्तराखंड के अति प्राचीन मंदिरों के साथ का है। सती लोगों के ज्योतिर्मठ स्थित गांव डाड़ों यानि देव ढौंढ जिस पर जोशीमठ शहर बसा है,नंदप्रयाग के राजबख्टी और लंगासू के बढाणु गांव कार्तिकेयपुरम साम्राज्य से जुड़े अनछुए ऐतिहासिक तथ्यों को समेटे हैं। ध्यान रहे उत्तराखंड में सती लोग केवल उसी श्रृंखला में पाए जाते है जहां कार्तिकेयपुरमकालीन मंदिर अवस्थित हैं। चाहे गढ़वाल चाहे कुमायूं। इनकी बसावट के समीप विनायक, डूंगरी और ढौंढ जैसे नाम निकटता से जुड़े रहते हैं। वैसे गढ़वाल में राजवंशी थपलियालो की वंश परंपरा भी इन्हे सतियों से ही शुरु करती है। ये मूलतः सती ही थे जो थापली में बसने से थपलियाल हो गए। देवस्थान और नागनाथ पोखरी के चलते ध्यान आया।