उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस पर पिछली बातों से सबक ले मिलकर

प्रदेश का नव निर्माण करें 

आज के दिन स्मृति में कैद तमाम बातें याद आनी स्वाभाविक है क्योंकि इस दिन के लिए हम सबने मिलकर एक सपना देखा था। और सपने को साकार करने के लिए जो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा उस रास्ते में हज़ारों व्यवधानों को रौंध कर हम आगे बढे थे और अपने कई साथियों को खो कर उस सपने को हकीकत में तब्दील भी कर दिया किंतु सत्ता लोलुपता से बंधे कुछ लोगों ने आंदोलनकारियों की अनदेखी कर खुद प्रदेश की बागडोर संभाल ली जिससे आंदोलन से जुड़े लोग और उनके परिवार आहत भी हुए। अपनी अवहेलना सहकर भी उन्हें इस बात की तसल्ली थी कि प्रदेश के लोगों ने जिस तरह के प्रदेश की कामना की थी वो अब उन्हें प्राप्त होगा। लेकिन धीरे धीरे उनकी आशाएं क्षीण होने लगी और प्रदेश पहले के मुकाबले और भी गर्दिश में जाता गया । इसका एक मात्र कारण अपनी राजनितिक महत्वाकांक्षाओं के लिए राजनेताओं द्वारा प्रदेश की अनदेखी कर केंद्र में अपने आकाओं को खुश करना रहा। 

वक्त के साथ सत्ताधारी भी बदले लेकिन जवां होते पहाड़ की मनोदशा को न समझ सके और पहाड़ दरकता रहा टूटता रहा और नौबत यहां तक आ गई कि प्रदेश वासियों को मजबूरन अपने गांवों से पलायन करना पड़ा और पलायन इस तेजी के साथ हुआ कि अनेकों गांव आज मनुष्य विहीन हो गए। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के साधन चरमरा गए।  इतना होने के बाद कुछ मुखिया ऐसे भी आए जिन्होंने प्रदेश हित में अनेकों क्रांतिकारी कदम उढ़ाये जिनका लाभ लोगों को मिला। आज लगभग प्रत्येक गांव सड़क मार्ग से जुड़ चुका है साथ ही बिजली से जगमगा भी रहे हैं इसके अलावा रिवर्स पलायन के लिए कई ठोस कदम उठाये गए किंतु वे पर्याप्त नहीं थे। लोगों की जो बुनियादी समस्या थी जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जो जस के तस ही रहे। 

अब जब प्रदेश जवां होकर 21 वें वर्ष में है तो हमें भी चाहिए कि नई सोच व नये इरादों के साथ पुरानी बातों को नज़र अंदाज़ कर एक नए प्रदेश की कामना के साथ मिलकर काम करना चाहिए। सरकारें अपने हिसाब से कार्य करती रहती है लेकिन अब हमें भी अपनी सहभागिता निभानी होगी। प्रदेश में लगातार हो रहे बांधों का निर्माण भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है इसका प्रमाण आप स्वतः देख रहे होंगे कि किस तरह प्रत्येक वर्ष भयंकर आपदा मनुष्य के साथ साथ जल जंगल को भी नष्ट कर रही है अतः प्रदेश के प्रत्येक रहवासी और प्रवासी का फ़र्ज़ है कि अधिक से अधिक बृक्षारोपण कर जल जंगल का सरक्षण करे। लघु कुटीर उद्योग व पर्यटन ये दो व्यवसाय ऐसे है जिनसे हम अपनी व प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृठ कर सकते है बस जरुरत है दृढ संकल्प व इच्छाशक्ति की। हालाँकि आज हमारे बहुत से युवा रिवर्स पलायन कर आधुनिक खेती में हाथ अज़मा रहे है और उन्हें सकारात्मक परिणाम भी मिल रहे है। तो चलो इस शुभ दिवस पर हम सब मिलकर संकल्प करें कि अपने गांव व प्रदेश के लिए अपने अनुभवों को एक दूसरे से साँझा कर एक उन्नत प्रदेश बनायें। 

आओ सब मिलकर दूर करें निराशा का धुवां 

काम ऐसे करें कि प्रदेश दिखे 21 वर्ष सा जवां। 

समस्त प्रदेश वासियों को राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

©द्वारिका चमोली (डीपी)

 





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