चमोली खबर : ग्रामोत्थान परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिकी का बना सशक्त मंच महिलाओं को मिल रहा स्वरोजगार
चमोली : जनपद में ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष एवं सहायतित ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों के रूप में महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण देकर आजीविका के विविध अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
880 अति निर्धन महिलाएं उठा चुकी हैं लाभ
अब तक जनपद में परियोजना के माध्यम से कुल 880 अति निर्धन लाभार्थियों को प्रति लाभार्थी ₹35,000 की दर से लगभग ₹3 करोड़ 8 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। यह सहायता लाभार्थियों को अपने उद्यम स्थापित करने एवं उनके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रूचि के अनुसार स्थानीय संसाधनों से कर रही आय सृजन
महिलाओं को स्थानीय संसाधनों के आधार पर उनकी रुचि के आधार पर विभिन्न स्त्रोतों से आय की गतिविधयों से जोड़ा जा रहा है। इनमें डेयरी, सिलाई-कढ़ाई, ब्लैकस्मिथ (लौह शिल्प), पोल्ट्री, बकरी पालन, लघु व्यवसाय एवं अन्य स्वरोजगार गतिविधियां शामिल हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप महिलाएं अब न केवल अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। परियोजना के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता एवं सामाजिक भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। कई महिलाएं सफल उद्यमी के रूप में उभरकर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही हैं।
जिला परियोजना प्रबंधक ने की महिलाओं की सराहना
जिला परियोजना प्रबंधक शशिकांत यादव ने कहा ग्रामोत्थान परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं, विशेष रूप से अति निर्धन परिवारों को सतत आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। चमोली जनपद में महिलाओं द्वारा जिस प्रकार से इन अवसरों को अपनाकर सफल उद्यम स्थापित किए जा रहे हैं, वह अत्यंत सराहनीय है। यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त भी बना रही है।
ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना चमोली जनपद में महिला सशक्तिकरण एवं सतत आजीविका संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी साकार करने में सहायक सिद्ध हो रही है।