दिवालीखाल / गैरसैंण: उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण के हक और राज्य की अस्मिता को लेकर 15 अगस्त 2026 को देहरादून से प्रारंभ हुई ऐतिहासिक पैदल पथ यात्रा अपने निर्धारित पड़ावों को पार करते हुए आज दिवालीखाल पहुंच गई है। कल, 1 सितंबर को गैरसैण में उत्तराखंड के इतिहास का एक नया अध्याय लिखा जाएगा, जहां स्थायी राजधानी निर्माण की मांग को लेकर भारी जनसैलाब जुटने जा रहा है।

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आदिबद्री से खेती गांव तक का सफर और भव्य स्वागत

यात्रा के क्रम में 30 अगस्त को आदिबद्री से 12-15 किलोमीटर की कठिन दूरी तय कर यात्रियों का दल ‘खेती’ गांव पहुंचा। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विनोद सिंह नेगी ने यात्रियों के थके-हारे होने के बावजूद उनके अडिग संकल्प और हौसले को नमन करते हुए उनके रहने, खान-पान और जलपान की सर्वोत्तम सुख-सुविधाओं की व्यवस्था की। श्री नेगी एवं क्षेत्रीय जनता ने यात्रियों पर फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा के साथ भव्य स्वागत किया और उनकी हर संभव सेवा कर उनका उत्साहवर्धन किया। आज, 31 अगस्त को खेती से प्रस्थान कर लगभग 12 से 15 किलोमीटर की पैदल दूरी नापने के बाद यात्रा का रात्रि विश्राम दिवालीखाल में है। कल यह यात्रा गैरसैंण पहुंचेगी।

उम्र पर भारी आंदोलनकारियों का जज्बा और नेतृत्व

पूर्व आईएएस अधिकारी एवं उत्तराखंड शासन के पूर्व सचिव श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में चल रही इस यात्रा का मार्गदर्शन वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी श्री रामेश्वर शर्मा हाथ में तिरंगा थामे अग्रिम पंक्ति में रहकर कर रहे हैं। यात्रा में 76 वर्षीय वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी श्री गोपाल दत्त कुमेड़ी (मुजफ्फरनगर, मसूरी एवं रामपुर तिराहा कांड के साक्षी व पैर में गोली लगने के बावजूद) इस उम्र में भी अदम्य साहस का परिचय देते हुए निरंतर पैदल चल रहे हैं।

इसके साथ ही राज्य आंदोलनकारी श्री रमेश दत्त नौटियाल, रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री दान सिंह मिगवाल, मासी (ग्राम झुडंगा) से श्री आनंद राम और श्री चंद्रमोहन नेगी लगातार तन-मन-धन और सक्रिय भागीदारी से यात्रा को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। मार्ग में क्षेत्रीय जनता का अपार समर्थन मिल रहा है और सड़कों पर उतरकर की जा रही पुष्पवर्षा यात्रियों का उत्साह बढ़ा रही है।

1 सितंबर को गैरसैण में महा-आह्वान: बनेगी उग्र आंदोलन की रणनीति

यात्रा की आयोजन समिति ने देवभूमि उत्तराखंड के सभी जागरूक नागरिकों, प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं से 1 सितंबर 2026 को अधिक से अधिक संख्या में दिवालीखाल अथवा रामलीला मैदान, गैरसैंण पहुंचने का पुरजोर आह्वान किया है।

1 सितंबर को प्रातः सभी यात्री व क्षेत्रवासी गैरसैंण स्थित रामलीला मैदान में एकत्र होंगे, जहां पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर शीश नवाया जाएगा। तत्पश्चात, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर सरकार के समक्ष आगे की व्यापक रणनीति और उग्र आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।


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