नई दिल्ली : राजधानी के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में रविवार को राष्ट्रीय हरेला महोत्सव के उपलक्ष्य में ‘अमर संदेश’ समाचार पत्र द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर विचार गोष्ठी और पर्यावरण गौरव सम्मान 2026 का आयोजन किया गया। कंक्रीट के जंगल बन चुकी दिल्ली में जब देवभूमि उत्तराखंड के लोकपर्व ‘हरेला’ के बहाने पर्यावरण संरक्षण की बात शुरू हुई, तो राजनीति से लेकर चिकित्सा और कला जगत के दिग्गज एक मंच पर आ गए। इस आयोजन ने साबित किया कि ग्लोबल वॉर्मिंग के इस दौर में प्रकृति को बचाने का असली रास्ता हमारी सांस्कृतिक जड़ों से ही होकर गुजरता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस अनूठी गोष्ठी की चार सबसे बड़ी बातें, जो इसे आम सरकारी कार्यक्रमों से अलग बनाती हैं:
सियासत किनारे, पर्यावरण पर सब एक साथ
आमतौर पर राजनीतिक मंचों पर तीखी बहस देखने को मिलती है, लेकिन यहां माहौल बिल्कुल जुदा था। इस पर्यावरण आयोजन में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में दिल्ली भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. विनोद बछेती, कांग्रेस नेता हरपाल रावत, दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय दरमोड़ा, अध्यक्ष दिल्ली महिला आयोग दिल्ली सरकार श्रीमती लता गुप्ता और मैक्स अस्पताल के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.दीपक अरोरा, निदेशक गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति राजघाट नई दिल्ली डॉ. संजीत कुमार,कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. के सी पांडेय एक साथ बैठे नजर आए। सभी ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक सुर में कहा कि हरेला सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि धरती को हरा-भरा रखने का हमारा सामूहिक सुरक्षा कवच है।
घुगुती फाउंडेशन एवं अन्य ग्रुप्स ने दिखाया भारतीय संस्कृति का अनूठा रूप

पर्यावरण पर गंभीर विमर्श के बीच जब कोमल राणा नेगी के नेतृत्व में ‘घुगुती फाउंडेशन’ के कलाकार मंच पर उतरे, तो पारंपरिक गीतों पर दी गई उनकी मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही बाल कलाकारों ने कृष्ण और कालिया नाग युद्ध की सुन्दर नृत्य प्रस्तुति देकर सबका मन मोह लिया। वहीं अन्य कलाकारों ने भी नृत्य नाटिका द्वारा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस सांस्कृतिक तड़के ने संदेश दिया कि प्रकृति से जुड़ना कोई उबाऊ काम नहीं, बल्कि हमारे उत्सवों का हिस्सा है।

जमीन पर काम करने वाले योद्धाओं का सम्मान
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी पल वह था जब ‘पर्यावरण गौरव सम्मान’ देकर उन समाजसेवियों और पत्रकारों को प्रोत्साहित किया गया जो धरातल पर काम कर रहे हैं। इसने समाज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नई सकारात्मक ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा की भावना को जगाने का काम किया। अतिथियों ने अपने हाथों से यह सम्मान देकर उनके हौसले को सलाम किया। इस दूरदर्शी पहल के लिए सभी वक्ताओं ने ‘अमर संदेश’ के संपादक अमर चंद का विशेष आभार जताया।

महासंगम में जुटे देवभूमि के प्रबुद्ध जन
इस पर्यावरण संरक्षण गोष्ठी में दिल्ली-एनसीआर में रह रहे उत्तराखंड समाज के प्रबुद्धजनों की भारी मौजूदगी रही। कार्यक्रम में हरीश असवाल, अनिल पंत, प्रताप थलवाल, उदय ममगाईं, सुभाष गुसाईं, जगमोहन बिष्ट, दिगपाल कैंतुरा, सुरेंद्र हालसी, मोहन रावत जैसे प्रबुद्ध समाजसेवियों के साथ-साथ पत्रकारिता जगत से दीप सिलोड़ी, राजेश डंडरियाल, डीएस नेगी, हरीश रावत, विनोद मनकोटी, द्वारिका प्रसाद चमोली, रूप सिंह गुसाईं, ओंकार कोली, ग्रामीण पत्रकार जगमोहन डांगी, सत्येन्द्र नेगी और मायाराम बहुगुणा शामिल हुए। महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. कुसुम भट्ट, आशा नेगी, हेमा उनियाल, रजनी जोशी, कुम्मु जोशी भटनागर, भारती नेगी, विजय लक्ष्मी नौटियाल और संगीता बिष्ट ने भी पर्यावरण जागरूकता की इस मुहिम में अपनी आवाज बुलंद की।
मुख्य संदेश: कार्यक्रम का लब्बोलुआब यही रहा कि सिर्फ पौधे लगाना काफी नहीं है, बल्कि ‘हरेला’ की भावना को अपनाते हुए हर पौधे को पेड़ बनने तक गोद लेना होगा।

