श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर फूलों और लाइटों से सजा हुआ पावन बदरीनाथ धाम मंदिरबद्रीनाथ धाम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की भव्य तैयारियां, 4 और 5 सितंबर को सजेगा भगवान बद्रीनाथ का दरबार

बद्रीनाथ : सनातन धर्म के परम पावन तीर्थ बद्रीनाथ धाम में इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व अत्यंत धूमधाम, हर्षोल्लास और भव्य तरीके से मनाए जाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आगामी 4 सितंबर को बद्रीनाथ धाम के मुख्य मंदिर परिसर में कान्हा के जन्मोत्सव की गूंज सुनाई देगी। इस महापर्व को ऐतिहासिक और अलौकिक बनाने के लिए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने युद्धस्तर पर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के स्वागत और भगवान के विशेष श्रृंगार के लिए पूरे बद्रीनाथ धाम को दिव्य रूप दिया जा रहा है।

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इस बार का जन्मोत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद अनूठा होने वाला है। बद्रीनाथ मंदिर समिति के साथ-साथ स्थानीय पंडा समाज और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी इस महाआयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी श्रद्धा के साथ जुटे हुए हैं।

रंग-बिरंगी लाइटों और सुगंधित फूलों से महकेगा गर्भगृह

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर बद्रीनाथ धाम के मुख्य मंदिर, सिंह द्वार और पूरे परिसर को आकर्षक एवं अलौकिक ढंग से सजाया जा रहा है। बीकेटीसी के अधिकारियों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से मंगाए गए विशेष सुगंधित फूलों और आधुनिक एलईडी लाइटों से समूचे बद्रीनाथधाम को जगमगाया जा रहा है। रात के समय जब अलकनंदा नदी के तट पर स्थित यह पावन बद्रीनाथ धाम रोशनी से नहाएगा, तो इसका दृश्य किसी स्वर्ग से कम प्रतीत नहीं होगा। बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि कतारों में खड़े भक्तों को सुगमता से दर्शन प्राप्त हो सकें।

4 सितंबर की मध्यरात्रि: विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती

बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि 4 सितंबर को जन्माष्टमी के मुख्य दिन बद्रीनाथ धाम में धार्मिक अनुष्ठानों की एक लंबी श्रृंखला चलेगी। मध्यरात्रि में जैसे ही घड़ी की सुइयां 12 पर पहुंचेंगी और भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का समय होगा, वैसे ही बद्रीनाथ धाम के गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और दिव्य महाआरती शुरू हो जाएगी।

इस अलौकिक धार्मिक अनुष्ठान को बद्रीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल और वेदपाठी रवींद्र भट्ट की देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया जाएगा। मध्यरात्रि की इस विशेष पूजा में भगवान को माखन, मिश्री और छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने के लिए बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ भी स्वयं बद्रीनाथ धाम परिसर में उपस्थित रहकर व्यवस्थाओं की कमान संभालेंगे।

5 सितंबर को बदरीश पंडा पंचायत का भव्य जन्मोत्सव कार्यक्रम

मुख्य जन्माष्टमी के अगले दिन, यानी 5 सितंबर को बदरीश पंडा पंचायत की ओर से बद्रीनाथ धाम में एक और भव्य श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पंडा पंचायत के अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस दिन का मुख्य आकर्षण स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का अद्भुत संगम होगा।

योजना के अनुसार, ऐतिहासिक बामणी गांव से भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी लीलाओं पर आधारित विभिन्न मनमोहक झांकियां निकाली जाएंगी। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों और जयकारों के साथ ये झांकियां पूरे बद्रीनाथ धाम क्षेत्र की परिक्रमा करते हुए मुख्य मंदिर परिसर पहुंचेंगी।

भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजेगी शाम

झांकियों के बद्रीनाथ धाम परिसर में पहुंचने के बाद वहां एक विशाल धार्मिक और सांस्कृतिक सभा का आयोजन होगा। बद्रीनाथ धाम के प्रांगण में स्थानीय कलाकारों, पंडा समाज के युवाओं और महिला मंगल दलों द्वारा देर रात तक सुंदर भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए जाएंगे। भगवान कृष्ण और विष्णु जी के भजनों से पूरी अलकनंदा घाटी और बद्रीनाथ धाम गुंजायमान हो उठेगी। इस अवसर पर दही-हांडी प्रतियोगिता और बच्चों के लिए बाल-कृष्ण रूप सज्जा जैसी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा सकती हैं, जो श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेंगी।

श्रद्धालुओं में भारी उत्साह, चारों तरफ भक्तिमय माहौल

नियमित रूप से मौसम के सुहावने होने के कारण इन दिनों बद्रीनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। जन्माष्टमी के इस पावन मौके पर बद्रीनाथ धाम में मौजूद श्रद्धालु खुद को बेहद सौभाग्यशाली मान रहे हैं। देश के कोने-कोने से आए भक्तों का कहना है कि बद्रीनाथ धाम जैसे पावन और जीवंत विष्णु क्षेत्र में श्रीकृष्ण (जो कि भगवान विष्णु के ही पूर्णावतार हैं) का जन्मोत्सव देखना उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण होगा।

प्रशासन और मंदिर समिति ने यात्रियों से अपील की है कि वे शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और इस पावन हिमालयी क्षेत्र के नियमों का पालन करते हुए बद्रीनाथ धाम के इस भव्य और पावन उत्सव का आनंद उठाएं।