देहरादून: उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में ‘उत्तराखण्ड स्टेट सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एण्ड गुड गवर्नेंस’ (USCPPGG) की शासी निकाय (Governing Body) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में पारंपरिक सरकारी ढर्रे से हटकर राज्य को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई लीक से हटकर फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अब राज्य की नीतियां केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर शोध (Research), नवाचार (Innovation) और कड़े मूल्यांकन के आधार पर तय होंगी।

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इस पूरी बैठक में गुड गवर्नेंस’ के विजन को मुख्य रूप से 5 बड़े स्तंभों में समझा जा सकता है, जो आने वाले समय में उत्तराखण्ड की सूरत और सीरत बदलने वाले हैं:

1. छात्रों को स्टाइपेंड: रिसर्च बनेगा नीति निर्माण का आधार


बैठक में युवाओं को सीधे नीति निर्धारण की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए एक क्रांतिकारी फैसला लिया गया। राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के प्रतिवर्ष 10 स्नातकोत्तर (Postgraduate) छात्र-छात्राओं को ‘कैपस्टोन परियोजना’ (Capstone Project) के लिए स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि राज्य की भौगोलिक चुनौतियों, आपदा प्रबंधन और स्थानीय आवश्यकताओं जैसे प्राथमिकता वाले विषयों पर युवा फ्रेश माइंडसेट के साथ रिसर्च करेंगे। इन शोधों से निकले निष्कर्षों का सीधा उपयोग सरकार अपनी गुड गवर्नेंस’ की योजनाओं को और अधिक व्यावहारिक बनाने में करेगी।

2. ‘हाई वैल्यू-लो वॉल्यूम’ उत्पाद और एमएसएमई पर दांव


उत्तराखण्ड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए गवर्निंग बॉडी के सदस्यों ने गुड गवर्नेंस’ के लिए एक बेहतरीन आर्थिक मॉडल सुझाया है। राज्य में अब ‘हाई वैल्यू-लो वॉल्यूम’ (कम मात्रा लेकिन उच्च मूल्य वाले उत्पाद जैसे- विशेष जड़ी-बूटियां, ऑर्गेनिक उत्पाद, हस्तशिल्प) को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) पर विशेष फोकस किया जाएगा। यह रणनीति पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था तैयार करने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

3. रिवर्स माइग्रेशन का जरिया बनेगा ‘होम टूरिज्म’


बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए ‘होम टूरिज्म’ (Home Tourism) को एक प्रमुख औजार के रूप में विकसित करने पर सहमति बनी। पहाड़ों के पारंपरिक घरों को पर्यटन से जोड़कर न केवल स्थानीय संस्कृति का संरक्षण होगा, बल्कि ग्रामीणों के लिए उनके घर पर ही रोजगार और स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा होंगे।

4. जवाबदेही तय: वार्षिक मॉनिटरिंग और 8 रिफॉर्म एरिया


अक्सर योजनाएं बनती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका सटीक मूल्यांकन नहीं हो पाता। इस कमी को दूर करने के लिए बैठक में तय हुआ कि राज्य के भावी विकास और गुड गवर्नेंस’ से जुड़े 8 प्रमुख सुधार क्षेत्रों (Reform Areas) पर विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि अब योजनाओं की सफलता के लिए ‘वार्षिक मॉनिटरिंग’ के कड़े लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। नीतियों का समय-समय पर परीक्षण होगा कि क्या वाकई जनता को उनका लाभ मिल रहा है या उनमें सुधार की जरूरत है। इसके साथ ही जिला स्तर पर तैनात अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाएंगे।

5. ‘विकसित उत्तराखण्ड-2047’ का 6-सूत्रीय रोडमैप


बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण रहा साल 2047 तक गुड गवर्नेंस’ से उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में शुमार करने का विजन। इसके लिए सरकार ने 6 मुख्य क्षेत्रों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है:

  • आर्थिक विकास एवं रोजगार: स्थानीय स्तर पर मजबूत आर्थिकी का निर्माण।
  • मानव संसाधन एवं कल्याण: युवाओं और महिलाओं का कौशल विकास और स्वास्थ्य।
  • वन, जैव विविधता एवं जलवायु अनुकूलन: पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास।
  • अवस्थापना विकास: पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर।
  • स्थानीय स्वशासन: पंचायतों और नगर निकायों को अधिक मजबूत बनाना।
  • तकनीक आधारित सुशासन: ई-गवर्नेंस के जरिए भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी व्यवस्था।

सतत विकास (SDG) में नंबर वन है उत्तराखण्ड


इस बैठक में यह गौरवमयी जानकारी भी साझा की गई कि सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को हासिल करने के मामले में उत्तराखण्ड सभी हिमालयी राज्यों में पहले पायदान पर है। यूएससीपीपीजीजी (USCPPGG) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के आपसी सहयोग से इस काम को अब ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर ले जाने (स्थानीयकरण) की तैयारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इन कड़े और विजनरी फैसलों से साफ है कि उत्तराखण्ड अब तात्कालिक राहत वाली राजनीति से आगे बढ़कर दीर्घकालिक (Long-term) और टिकाऊ विकास की राह पर चल पड़ा है।