राजू बोहरा / वरिष्ठ बॉलीवुड फिल्म पत्रकार

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नई दिल्ली। उत्तराखंड की पारंपरिक लोक गायकी और लोक संस्कृति को देश-विदेश में पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध लोक गायिका हेमा नेगी करासी को प्रतिष्ठित ‘अडानी प्रेजेंट्स अमेजिंग इंडिया अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उत्तराखंड की लोक गायकी और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
हेमा नेगी करासी लंबे समय से उत्तराखंड के पारंपरिक लोकगीतों, लोकधुनों और लोक वाद्यों को अपनी गायकी के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। उनकी गायकी में पहाड़ की लोक परंपराओं, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक जड़ों की झलक दिखाई देती है। उन्होंने देश के विभिन्न मंचों के साथ-साथ विदेशों में भी उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत को प्रस्तुत किया है।
लोक गायकी को केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित न रखते हुए हेमा नेगी करासी इसके संरक्षण और नई पीढ़ी से जुड़ाव के लिए भी सक्रिय हैं। ‘एचएनके सांस्कृतिक सेवा ट्रस्ट’ के माध्यम से वह बच्चों और युवाओं को पारंपरिक वाद्ययंत्रों का निःशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं। उनका प्रयास उत्तराखंड की लोक संगीत परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे पहले भी हेमा नेगी करासी को उनकी कला साधना के लिए ‘तीलू रौतेली पुरस्कार’ और ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों के लिए नामित किया जा चुका है।
सम्मान मिलने पर हेमा नेगी करासी ने कहा कि यह पुरस्कार उनके व्यक्तिगत सम्मान से कहीं अधिक उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक वाद्यों और लोक कलाकारों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि पहाड़ की लोक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना उनका निरंतर प्रयास रहेगा।
हेमा नेगी करासी को मिले इस सम्मान से उत्तराखंड के लोक कला और संगीत जगत में खुशी का माहौल है। कला प्रेमियों और उनके प्रशंसकों ने इसे उत्तराखंड की लोक गायकी की उपलब्धि बताते हुए उन्हें बधाई दी है।

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