नई दिल्ली / उत्तराखंड सदन: नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में रविवार को एक बेहद गरिमामयी और भव्य “लोक जीवन के अन्वेषक : हेम पंत”परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बिजनेस उत्तरायणी (Business Uttarayani) की अनूठी श्रृंखला ‘सेलिब्रेटिंग कम्युनिटी पिलर्स’ (Celebrating Community Pillars) के अंतर्गत, हिमालयन रिसोर्सेज इन्हेंसमेंट सोसाइटी के तत्वाधान में सुप्रसिद्ध नाट्य निर्देशक, बेहतरीन मंच संचालक व प्रख्यात कवि श्री हेम पंत जी के ‘व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। जिसके तहत उन्हें ‘लोक संस्कृति विशिष्ट सेवा 2026 सम्मान’ से विभूषित किया गया।
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इस सांस्कृतिक और गौरवमयी शाम का संयोजन व कुशल संचालन बिजनेस उत्तरायणी के संस्थापक श्री नीरज बवाड़ी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर की कई जानी-मानी हस्तियों, रंगकर्मियों, उद्यमियों, वरिष्ठ पत्रकारों, लोक कलाकारों, फिल्म अभिनेताओं और पंत जी के पारिवारिक मित्रों ने शिरकत कर उनके योगदान को सराहा।
गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस विशेष आयोजन की अध्यक्षता पूर्व महापौर (EDMC) व वर्तमान निगम पार्षद (गीता कॉलोनी) श्रीमती नीमा भगत जी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ उद्यमी एवं फिल्म निर्माता श्री संजय जोशी जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक श्री मदन मोहन सती जी की गरिमामयी उपस्थिति विशेष आकर्षण रही।
विशिष्ट अतिथियों की सूची में गेल (GAIL) के पूर्व निदेशक श्री बी एस नेगी जी, डीपीएमआई (DPMI) के चेयरमैन तथा दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद बछेती जी, सीहॉक्स (SeaHawks) के चेयरमैन व वरिष्ठ उद्यमी श्री नरेंद्र लडवाल जी, वरिष्ठ फिल्म निर्देशिका सुशीला रावत जी और सामाजिक उद्यमी एवं लेखक डॉ. शरद जोशी जी आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कला और उत्तराखंड संस्कृति को समर्पित जीवन
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के उपक्रम एमटीएनएल (MTNL) के उच्च अधिकारी पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी श्री हेम पंत जी ने पूर्ण समर्पित भाव से रंगमंच और उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति के साथ अपना गहरा जुड़ाव बनाए रखा। वह ‘पर्वतीय लोक कला मंच, दिल्ली’ के संस्थापक सदस्य होने के साथ-साथ वर्तमान में इसके महासचिव भी हैं। उन्होंने अपने जीवन में ‘बाला गोरिया’, ‘कगार की आग’, ‘राजुला मालूशाही’, ‘ऋतु रैण’, ‘राज्य एक स्वप्न’ और ‘बारामासा’ जैसे कालजयी नाटकों का सफल निर्देशन किया। इसके अलावा उन्होंने कई ऐतिहासिक पुस्तकों का लेखन किया और कई फिल्मों में अपने दमदार अभिनय की छाप भी छोड़ी। परिचर्चा “लोक जीवन के अन्वेषक : हेम पंत” के दौरान वक्ताओं ने बताया कि पंत जी ने अनगिनत नवोदित कलाकारों को तराश कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने में एक मार्गदर्शक (मेंटर) के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।
संस्मरण, कविता और लोक संगीत से सजी महफिल
कार्यक्रम के दौरान श्री कमल कर्नाटक जी द्वारा निर्मित एक बेहतरीन लघु वृत्तचित्र (Documentary) प्रदर्शित की गई, जिसने हेम पंत जी की जीवन यात्रा के विभिन्न सुनहरे आयामों और उनकी महान कृतियों को जीवंत कर दिया।
इसके साथ ही अणुव्रत के निदेशक डॉ. रमेश कांडपाल जी ने पंत जी के पूरे जीवन चित्र पर आधारित एक बेहद खूबसूरत और मार्मिक कविता प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक भुवन रावत ने पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र ‘हुड़ुके’ और पारंपरिक ‘न्योली’ गायन से तथा वरिष्ठ लोकगायक सत्येन्द्र फरिंडिया ने अपने सदाबहार गीतों से पूरे सदन को मंत्रमुग्ध कर दिया।
“लोक जीवन के अन्वेषक : हेम पंत” समारोह में वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी जी, व्योमेष जुगरान जी, लक्ष्मी रावत जी, प्रो. डॉ. आशा जोशी जी, मशहूर जादूगर डॉ. के सी पाण्डेय जी, संगीतकार वीरेन्द्र नेगी ‘राही’ जी, मंजू बहुगुणा जी, सुधीर पंत, ममता कर्नाटक, दीपिका पाण्डेय, खुशहाल सिंह बिष्ट जी, खुशहाल सिंह रावत जी और महेन्द्र लटवाल जी सहित कई दिग्गजों ने पंत जी के साथ जुड़े अपने व्यक्तिगत जीवन के खट्टे-मीठे संस्मरणों और उनके ऐतिहासिक कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
भावुक पल और आभार प्रदर्शन
मीडिया जगत से वरिष्ठ पत्रकार राजेश डंडरियाल, राजू बोहरा, अमर चंद, राजकुमार शर्मा आदि सहित कई सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस भावुक अवसर पर पंत जी के परिवार से उनकी बेटी वंदना पाठक, दिव्या जोशी तथा नातिणि नित्या जोशी ने भी अपने विचार और भाव व्यक्त किए।
“लोक जीवन के अन्वेषक : हेम पंत” कार्यक्रम के समापन पर श्री हेम पंत जी ने खुद सभी अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति, स्नेह और सहभागिता के लिए सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में उनकी ओजस्वी व तेजस्वी वाणी और उत्कृष्ट काव्य रचना ने वहां मौजूद हर एक शख्स को भाव-विभोर कर दिया। इस पूरे भव्य आयोजन को सफल बनाने में सुधीर पंत, तारा बवाड़ी, भुवन रावत और नित्या जोशी आदि ने बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई।

