पोखड़ा ब्लॉक सभागार में आयोजित स्वैच्छिक चकबंदी कार्यशाला में मंच पर उपस्थित वक्ता और अतिथिपौड़ी : उत्तराखंड के पोखड़ा में स्वैच्छिक चकबंदी कार्यशाला का आयोजन, पलायन रोकने और बंजर भूमि को आबाद करने पर मंथन

पौड़ी : उत्तराखंड के पौड़ी जिले के अंतर्गत आने वाले पोखड़ा ब्लॉक सभागार में 29 अक्टूबर को स्वैच्छिक चकबंदी कार्यशाला का एक बेहद महत्वपूर्ण और गरिमामयी आयोजन संपन्न हुआ। यह विशेष कार्यशाला हिमालय क्रांति पार्टी और चकबंदी मंच उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि सुधार, बिखरी हुई जोतों को एक जगह एकत्र करने और पहाड़ों से हो रहे लगातार पलायन की गंभीर समस्या पर लगाम लगाना था।

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कार्यशाला की अध्यक्षता चकबंदी मंच उत्तराखंड के अध्यक्ष और इस मुहिम के पुरोधा केवलानंद तिवारी द्वारा की गई, जबकि पूरे कार्यक्रम और बैठक का कुशल संचालन गाँव बचाओ अभियान से जुड़े अर्जुन सिंह रावत ने किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के तमाम प्रबुद्ध नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

ग्राम प्रधानों ने बढ़-चढ़कर भरे स्वैच्छिक चकबंदी के फॉर्म

इस स्वैच्छिक चकबंदी कार्यशाला का सबसे सकारात्मक और व्यावहारिक पहलू यह रहा कि इसमें पोखड़ा ब्लॉक के विभिन्न गांवों से आए ग्राम प्रधानों ने गहरी रुचि दिखाई। बैठक के दौरान उपस्थित ग्राम प्रधानों द्वारा स्वैच्छिक चकबंदी से संबंधित आवश्यक फॉर्म भरे गए। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब जमीनी स्तर पर ग्रामीण और जनप्रतिनिधि बिखरी हुई जमीन को एक जगह लाकर वैज्ञानिक ढंग से खेती करने के पक्ष में आ रहे हैं।

कहा गया कि यदि ग्राम प्रधान अपने स्तर पर गांवों में जागरूकता फैलाएंगे, तो वह दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड के पहाड़ों में हर खेत फिर से लहलहा उठेगा।

मंत्रियों के गांवों की स्थिति पर केवलानंद तिवारी का तंज और रानीखेत का उदाहरण

बैठक को संबोधित करते हुए चकबंदी मंच उत्तराखंड के अध्यक्ष केवलानंद तिवारी ने प्रदेश में चकबंदी एक्ट को सख्ती से लागू करवाने के लिए अपने जीवन के लंबे संघर्षों और अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कड़ी मेहनत और सामाजिक चेतना के बल पर पूर्व में रानीखेत के विभिन्न गांवों को चकबंदी की प्रक्रिया के लिए तैयार किया गया था।

इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी पर गहरी चिंता और तंज कसते हुए कहा कि शासन द्वारा उत्तराखंड सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों के गृह गांवों को चकबंदी के लिए विशेष रूप से चिन्हित किया गया था, लेकिन विडंबना यह है कि उन वीआईपी गांवों में भी आज तक व्यावहारिक स्तर पर चकबंदी का काम पूरा नहीं हो पाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस स्वैच्छिक चकबंदी कार्यशाला जैसी जन-जागरूकता गतिविधियों से ही जनता सरकार पर सही दबाव बना पाएगी।

काली हल्दी की खेती से बंजर खेतों को किया आबाद: अर्जुन सिंह रावत

बैठक के संचालक और ‘गाँव बचाओ अभियान’ के सक्रिय चेहरे अर्जुन सिंह रावत ने इस स्वैच्छिक चकबंदी कार्यशाला में अपनी मुहिम के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी। उन्होंने एक अनूठा उदाहरण पेश करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने पहाड़ों में बंजर हो चुके खेतों को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय स्तर पर काली हल्दी और सामान्य हल्दी की औषधीय खेती की शुरुआत की।

उन्होंने बताया कि इस अभिनव प्रयोग के जरिए कई एकड़ बंजर पड़े खेतों को फिर से आबाद किया गया है, जिसने गाँव के अन्य लोगों और युवाओं को भी पारंपरिक तथा नकदी खेती-बाड़ी की तरफ लौटने के लिए प्रेरित किया है।

गोल खाते की जमीन व्यक्तिगत होने से सुरक्षित होंगे खेत

कार्यशाला में चकबंदी मंच उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह नेगी ने एक बेहद तकनीकी और महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ों से इंसानों का पलायन रोकने का एकमात्र और सबसे अचूक हथियार चकबंदी ही है।

उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों और प्रतिनिधियों को तकनीकी सलाह देते हुए कहा कि गाँव वालों को मिलकर अपने ‘गोल खाते’ (संयुक्त खाते) की जमीनों का बंटवारा कर उन्हें व्यक्तिगत श्रेणी में दर्ज करवाना चाहिए। जब जमीन व्यक्तिगत और सुव्यवस्थित होगी, तभी खेतों की सही ढंग से घेराबंदी की जा सकेगी और वे जंगली जानवरों तथा बाहरी अतिक्रमण से सुरक्षित रह सकेंगे।

इसके साथ ही, हिमालय क्रांति पार्टी के चौबट्टाखाल विधानसभा प्रत्याशी दिनेश रावत ने सभी ग्राम प्रधानों को पूर्ण रूप से आश्वस्त किया कि यदि तहसील स्तर पर चकबंदी से संबंधित कोई भी कानूनी या प्रशासनिक समस्या आती है, तो वे व्यक्तिगत रूप से उनके साथ खड़े रहेंगे और हर संभव मदद पहुंचाएंगे।

कार्यशाला में ये प्रमुख हस्तियां रहीं उपस्थित

इस महत्वपूर्ण स्वैच्छिक चकबंदी कार्यशाला में क्षेत्र के कई दिग्गज राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से हिमालय क्रांति पार्टी के महासचिव शंकर दत्त सती, पोखड़ा के ब्लॉक प्रमुख संजय गुसाई, गाँव बचाओ अभियान के श्रवण कुमार रावत, और जिला पंचायत सदस्य बलवंत नेगी सहित भारी संख्या में विभिन्न ग्राम पंचायतों के जन-प्रतिनिधि और स्थानीय काश्तकार मौजूद रहे।

सभी उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे इस मुहिम को पोखड़ा ब्लॉक के घर-घर तक ले जाएंगे ताकि पहाड़ों का पानी और पहाड़ों की जवानी यहीं के काम आ सके।