चमोली, 05 नवंबर 2026 : दीपावली के पावन पर्व पर इस बार उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थानीय कला और संस्कृति की अनोखी चमक देखने को मिल रही है। ‘वोकल फॉर लोकल’ के नारे को धरातल पर उतारते हुए ग्रामीण महिलाओं ने त्योहार के बाजार को अपने हुनर से सजा दिया है। स्थानीय उत्पादों को एक बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को नई ताकत देने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय गोपेश्वर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में विशेष स्टॉल लगाए गए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इन स्टॉलों पर विकासखंड दशोली के अंतर्गत हरियाली क्लस्टर, देवर खडोरा की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए बेहद आकर्षक और पारंपरिक उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इन चमोली स्वयं सहायता समूह दीपावली उत्पाद प्रदर्शनियों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
ग्रामीण महिलाओं के हुनर और रचनात्मकता की अनोखी झलक
कलेक्ट्रेट परिसर में सजे इन स्टॉलों पर पहुंचते ही त्योहार की रौनक दोगुनी महसूस होने लगती है। महिलाओं ने अपनी रचनात्मकता और कलात्मक सोच का इस्तेमाल कर दीपावली के पारंपरिक एवं सजावटी सामान तैयार किए हैं। यहाँ हस्तशिल्प से लेकर हाथ से बने सुंदर मिट्टी के दीये, मोमबत्तियां और पूजा की सामग्रियां उपलब्ध हैं।
बाजार में चीन और अन्य बाहरी उत्पादों को कड़ी टक्कर देने के लिए महिलाओं ने शुद्ध रूप से स्थानीय मिट्टी, प्राकृतिक रंगों और कलाकृतियों का उपयोग किया है। इन उत्पादों को देखने और खरीदने के लिए कलेक्ट्रेट आने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनता की भारी भीड़ उमड़ रही है।
बजरंगबली, हिलांस और भवानी समूह के उत्पाद बने आकर्षण का केंद्र
इस बार के बाजार में चमोली स्वयं सहायता समूह दीपावली उत्पाद के तहत कई विशेष समूहों ने अपनी बेहतरीन कला का प्रदर्शन किया है:
बजरंगबली स्वयं सहायता समूह: इस समूह की महिलाओं द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए कलात्मक दीपक, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और मिट्टी के डेकोरेटिव आइटम्स लोगों को बेहद पसंद आ रहे हैं।
हिलांस और भवानी स्वयं सहायता समूह: इन समूहों द्वारा जैविक मसालों, स्थानीय अनाजों और पहाड़ी व्यंजनों के साथ-साथ गृह सज्जा के कई अनूठे उत्पाद बिक्री के लिए रखे गए हैं।
देवभूमि स्वयं सहायता समूह: समूह की सदस्य अंजू राणा और उनके साथ आई अन्य ग्रामीण महिलाएं मिट्टी के पारंपरिक दीयों के साथ-साथ दैनिक घरेलू उपयोग के कई अन्य बेहतरीन उत्पाद लेकर पहुंची हैं, जिनकी मांग बाजार में सबसे ज्यादा देखी जा रही है।
इन सभी महिलाओं द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए इन उत्पादों में उत्तराखंड की समृद्ध लोक कला, पहाड़ी परंपरा और ग्रामीण रचनात्मकता की साफ झलक देखने को मिल रही है।
रीप (REAP) और एनआरएलएम (NRLM) दे रहे हैं नई उड़ान
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में सरकारी योजनाएं बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। चमोली में ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को लगातार मार्गदर्शन और सहायता दी जा रही है।
इन मिशनों के तहत महिलाओं को केवल उत्पाद बनाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि उन्हें स्वरोजगार शुरू करने, उद्यमिता का विकास करने और सही मार्केटिंग (विपणन) के अवसरों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर जैसे प्रमुख स्थानों पर स्टॉल लगाने की सुविधा मिलने से इन ग्रामीण महिलाओं को बिचौलियों के बिना सीधे ग्राहकों तक अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए एक बहुत बड़ा और बेहतर मंच मिल गया है।
स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील, महिलाओं में बढ़ा उत्साह
कलेक्ट्रेट परिसर में स्टॉल लगाने वाली महिलाओं का कहना है कि प्रशासन के इस सहयोग से उन्हें बहुत मदद मिली है। त्योहार के समय जब लोग चीनी लड़ियों के बजाय मिट्टी के दीये और स्थानीय हस्तशिल्प खरीद रहे हैं, तो इससे उनका उत्साह और ज्यादा बढ़ गया है।
जिला प्रशासन और रीप की टीम ने भी आम जनता से अपील की है कि वे इस दीपावली पर अधिक से अधिक संख्या में इन चमोली स्वयं सहायता समूह दीपावली उत्पाद की खरीदारी करें, ताकि त्योहार की खुशियां और लक्ष्मी का आगमन सीधे इन मेहनती ग्रामीण महिलाओं के घरों तक भी पहुंच सके।

