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कर्णप्रयाग :
उत्तराखंड में स्वरोजगार करने वाले ग्रामीणों की मुख्य समस्या रहती है कि उत्पादों को बाजार कैसे मिले। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए जनमैत्री कल्पघाटी युवा समिति ने रूरल  मार्केटिंग वैन सेवा शुरू की है। जिसके जरिये सुदूरवर्ती गांवों में होने वाले उत्पादों को अब आसानी से बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा। 



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जोशीमठ की उर्गम घाटी में आजीविका संवर्धन के लिए जनमैत्री कल्पघाटी युवा समिति कृषक उत्पादक संगठन बनाने पर कार्य कर रही है। अपने पहले प्रयास में संस्था ने उर्गम, पाखी, पांडुकेश्वर, बड़ागांव और सलूड़ गांवों के लगभग 1200 काश्तकारों के कृषक उत्पादक संगठन बनाने के साथ ही उनके उत्पादों को  बेचने के लिए पांच संग्रहण केंद्र भी बनाए हैं। 

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बता दें कि जोशीमठ क्षेत्र के दुर्गम क्षेत्रों में  राजमा, चौलाई, आलू, सेब आदि की बेहतर पैदावार होती है लेकिन बाजार न मिलने के कारण ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में रूरल मार्केटिंग वैन का विकल्प इनके लिए एक नई आशा लेकर आया है।

समिति के सचिव प्रदीप चौहान ने बताया कि हमारा प्रयास है काश्तकारों के  उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। हम काश्तकारों के संग्रहण केंद्रों से उत्पादों को रूरल मार्केटिंग वैन के माध्यम से इनके स्थानीय बाज़ारों के साथ ही प्रदेश में लगने वाले विभिन्न मेलों और कार्यक्रमों में ले जायेंगे। इससे काश्तकारों का समय बचेगा आर्थिक स्थिति सुधरेगी और अन्य ग्रामीण भी स्वरोजगार की और आकर्षित होंगे।  


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