चमोली जिले के कर्णप्रयाग तहसील के कनोठ गांव में भूस्खलन के खतरे की जद में आये मकान और गौशालाएंचमोली जिले के कनोठ गांव में भूस्खलन से मची भारी तबाही, खतरे की जद में आए कई मकान और गौशालाएं

कर्णप्रयाग : उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार, 4 अक्टूबर की देर रात को कर्णप्रयाग तहसील के अंतर्गत चमोली जिले के कनोठ गांव में भूस्खलन की एक बेहद डरावनी घटना सामने आई है। भारी भूस्खलन के कारण अचानक एक विशाल पहाड़ी का हिस्सा दरक कर नीचे आ गिरा, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। इस आपदा के बाद से ही कनोठ गांव के ग्रामीण बेहद डरे और सहमे हुए हैं।

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देर रात पहाड़ी दरकने से सोए हुए ग्रामीणों में मची अफरातफरी

मिली जानकारी के अनुसार, कल रात जब ग्रामीण अपने घरों में सो रहे थे, तभी अचानक पहाड़ी से मलबे और पत्थरों के गिरने की जोरदार आवाजें आने लगीं। चमोली जिले के कनोठ गांव में भूस्खलन इतना भीषण था कि पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे आ गया। गनीमत यह रही कि मलबे की आवाज सुनते ही ग्रामीणों ने मुस्तैदी दिखाई और सुरक्षित स्थानों की ओर भागे, जिससे किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि, जमीन खिसकने और मलबे के कारण गांव में भारी तबाही मची है।

खतरे की जद में आए कई आशियाने और मवेशी घर

चमोली जिले के कनोठ गांव में भूस्खलन होने की वजह से कई आवासीय मकानों और गौशालाओं (मवेशी घरों) के ऊपर सीधे खतरा मंडराने लगा है। पहाड़ी से आए भारी मलबे के कारण कई घरों की दीवारों में दरारें आने की आशंका है, वहीं कई गौशालाएं मलबे की चपेट में आने की कगार पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर भूस्खलन का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो कई परिवार बेघर हो सकते हैं। प्रभावित ग्रामीण रात भर जागकर अपनी और अपने मवेशियों की जान बचाने की जद्दोजहद में जुटे रहे।

प्रशासन से त्वरित सहायता और विस्थापन की मांग

इस आपदा के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। चमोली जिले के कनोठ गांव में भूस्खलन की सूचना स्थानीय प्रशासन और तहसील टीम को दे दी गई है। ग्रामीणों ने सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग से तुरंत मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लेने, सुरक्षा दीवार का निर्माण करने और खतरे की जद में आए परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट (विस्थापित) करने की पुरजोर गुहार लगाई है।