कर्णप्रयाग : उत्तराखंड के कर्णप्रयाग क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सिमली में सिमली बेस अस्पताल के शासनादेश (Government Order) की मांग को लेकर क्षेत्र के लोगों ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए आगामी 11 अक्तूबर से शुरू होने वाली प्रसिद्ध रामलीला के मंचन को स्थगित कर दिया गया है। अब इसी दिन से सिमली बेस अस्पताल के लिए देहरादून तक एक विशाल पदयात्रा का आगाज किया जाएगा।

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यह महत्वपूर्ण निर्णय सोमवार को सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति और श्री राज राजेश्वरी चंडिका देवी रामलीला कमेटी की संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।

सरकार की नाकामी के खिलाफ आंदोलन का बिगुल

रामलीला मंडली के अध्यक्ष संजय डिमरी ने बैठक में बताया कि सरकार की नाकामियों के कारण लंबे समय से सिमली बेस अस्पताल का शासनादेश जारी नहीं हो पाया है। क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी के विरोध में इस बार नवरात्र के पावन पर्व पर होने वाले रामलीला मंचन को स्थगित रखने का कड़ा फैसला लिया गया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मंच पर मां चंडिका का नवरात्र पूजन अनवरत और विधि-विधान से जारी रहेगा।

29 सितंबर से शुरू होगा ‘गांव चलो अभियान’

सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि इस आंदोलन और पदयात्रा को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए मंगलवार, 29 सितंबर से ‘गांव चलो अभियान’ की शुरुआत की जा रही है। इसके तहत संघर्ष समिति के सदस्य गांवों में जाकर बैठकें करेंगे और जनसमर्थन जुटाएंगे। नवरात्र के पहले दिन मां चंडिका की विशेष पूजा-अर्चना के बाद भारी जनसमूह के साथ देहरादून के लिए पदयात्रा रवाना होगी।

इस मौके पर क्षेत्र के प्रमुख आंदोलनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में हेमंत टकोला, महेश डिमरी, विक्रम सिंह नेगी, भवान सिंह, हर्षवर्धन डिमरी, एसपी बहुगुणा और अरविंद मुसनी ने भी अपने विचार व्यक्त किए और सिमली बेस अस्पताल की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।