उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा हुई रद्द, जांच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने लिया फैसला





देहरादून :
 उत्तराखंड सरकार ने छात्रों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। अब तीन महीने के अंदर दोबारा कराई जाएगी परीक्षा। 

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आयोग ने 21 सितंबर को प्रदेश में स्नातक स्तरीय परीक्षा कराई थी, जिसमें करीब एक लाख पांच हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ प्रश्नो के स्क्रीन शॉट वायरल होने की सूचना के बाद विवाद बढ़ गया था। जिसे देखते हुए आयोग द्वारा तत्काल एसएसपी देहरादून को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया था। मुख्यमंत्री धामी ने मामले में एसआईटी गठन के साथ ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता वाले एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन भी किया था।  जांच आयोग ने सभी जगह हुए जनसंवाद के आधार पर अपनी रिपोर्ट शनिवार 11 अक्टूबर को सरकार को सौंप दी। 




जांच आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद प्रदेश सरकार की ओर से शनिवार को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। पेपर लीक प्रकरण के बाद उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले प्रदेश के तमाम युवा धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच सीएम धामी युवाओं के बीच पहुंचे थे और उनके द्वारा उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद युवाओं ने अपना धरना खत्म करते हुए सरकार को मामले में कार्रवाई करने के लिए दस दिन का समय दिया था, जिसकी मियाद आज पूरी हो रही थी। 

परीक्षा रद्द करने को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने कहा 

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा को छात्रों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए निरस्त कर दिया गया है, ताकि राज्य में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे। पुनः आयोजित होने वाली यह परीक्षा अन्य परीक्षाओं के कार्यक्रम पर कोई असर नहीं डालेगी। 

उत्तराखंड में हर छात्र के लिए निष्पक्ष अवसर और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। हमने नकल प्रकरण की जाँच के लिए CBI की संस्तुति कर दी है, हमारी सरकार छात्रों के भविष्य और अभिभावकों के विश्वास के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होने देगी।