बम-बम भोले के जयघोष से गूंजा हरिद्वार, कांवड़ यात्रा का भव्य आगाज, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हरिद्वार: श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा का विधिवत शुभारंभ गुरुवार से हो गया। सुबह से ही धर्मनगरी हरिद्वार ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठी। हर की पैड़ी और विभिन्न गंगा घाटों पर गंगाजल भरने के लिए शिवभक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कंधों पर आस्था की कांवड़ और हाथों में पवित्र गंगाजल लिए श्रद्धालु भगवान शिव का स्मरण करते हुए अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए।
रंग-बिरंगी कांवड़ों, भगवा वस्त्रों और शिवभक्ति के उत्साह ने पूरी धर्मनगरी को शिवमय बना दिया। गंगाजल भरने के बाद श्रद्धालु कठिन लेकिन अटूट आस्था से भरी यात्रा पर निकल पड़े। अब अगले कई दिनों तक हरिद्वार से लेकर देश के विभिन्न राज्यों तक आस्था की यह अविरल धारा बहती रहेगी। कांवड़ यात्रा 11 अगस्त तक चलेगी और इस दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है।
सुरक्षा के लिए 18 सुपर जोन, 40 जोन और 141 सेक्टर
कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। पूरे मेला क्षेत्र को 18 सुपर जोन, 40 जोन और 141 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। कांवड़ पटरी मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रमुख गंगा घाटों, मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस के साथ अर्द्धसैनिक बल के करीब 6000 जवान तैनात किए गए हैं।
यात्रा मार्गों पर लगातार पुलिस गश्त की जाएगी, जबकि ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी नेटवर्क और आधुनिक कंट्रोल रूम के माध्यम से हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान भी लागू किया गया है।
बाबा रामदेव ने की अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की अपील
योग गुरु बाबा रामदेव ने कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं से अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय है, इसलिए इस दौरान किसी भी प्रकार का नशा, हुड़दंग या उपद्रव शिवभक्ति की भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा, “सावन का महीना बहुत पवित्र होता है। यह महादेव की पूजा-अर्चना का समय है। कुछ लोग कांवड़ यात्रा के दौरान नशा करते हैं और हुड़दंग मचाते हैं। यह भगवान शिव का अपमान है। नशा करना या उपद्रव मचाना हमारे सनातन धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। मैं सभी कांवड़ियों से आग्रह करता हूं कि वे पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ शिवभक्ति में लीन रहें। हमें कांवड़ यात्रा को मिल रहे सम्मान और आदर की गरिमा को भी बनाए रखना चाहिए।”

