Basic primary school uttrakhand





उत्तराखंड के प्राथमिक विद्यालयों के कुछ शिक्षक घर बैठे उड़ा रहे है वेतन 

देहरादून : अक्सर सुनने में आता है कि उत्तराखंड में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है जिस पर कोई संज्ञान लेने को तैयार नहीं। आखिर क्यों और किसलिए उत्तराखंड के विद्यार्थियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अगर आप पूरे उत्तराखंड में घूमें तो देखेंगे कि किसी स्कूल में शिक्षक नहीं है तो कही स्कूल में ताला लगा हुआ है तो कहीं शिक्षक की जगह गांव का ही कोई व्यक्ति बच्चों को पढ़ा रहा है। शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं होती क्योंकि जो इंस्पेक्टर है वो अपनी रिपोर्ट में सब कुछ ओके लिखकर अपने अधिकारीयों तक पहुंचा देता है यही कारण है कि लापरवाह शिक्षकों का हौंसला इस कदर बढ़ा गया है कि अब ये  किसी बेरोजगार युवक को 10-12 हज़ार रूपये देकर अपनी जगह पढ़ाने के लिए रख लेते हैं और खुद घर बैठ कर सरकारी वेतन उड़ा रहे हैं। 

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इस तरह का एक ताजा मामला जनपद पौड़ी के एकेश्वर ब्लॉक के स्कूल से सामने आया है। शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार एकेश्वर ब्लॉक का राजकीय प्राथमिक विद्यालय बंठोली दुर्गम क्षेत्र में आता है।  यहां की प्रधानाध्यापिका ने अपने स्थान पर गांव की ही एक लड़की को 10 हज़ार रूपये के ठेके पर रखा था जो उनके द्वारा पढ़ाये जाने वाले सभी विषयों को पढ़ाती थी।  बार-बार की शिकायत के बाद जब निरीक्षण किया गया तो स्कूल को कई बार बंद पाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीईओ व डीईओ बेसिक ने मुख्यध्यापिका  को निलंबित कर दिया है। 

बताया जा रहा है कि शिक्षिका पिछले चार साल से अधिकतर स्कूल से गायब रहती थी और स्कूल ज्यादातर दिनों में बंद ही रहता था। बताया जा रहा है कि या शिक्षिका  मैदानी इलाके कोटद्वार की रहने वाली हैं और दुर्गम स्थल में तैनाती उनको रास नहीं आ रही थी जिस वजह से इसने गांव की एक लड़की हायर की और खुद घर में बैठ कर वेतन उठा रही थी जिसका खामियाजा इस क्षेत्र के गरीब बच्चों को भुगतना पड रहा था।




यह एक अकेला मामला नहीं है बल्कि ऐसे अनेकों मामले उत्तराखंड के विद्यालयों में देखने को मिल जायेंगे। 
बताया जा रहा है कि जनपद चमोली के आदिबद्री में भी ऐसा ही एक मामला संज्ञान में आया है जहां पति-पत्नी दोनों ही शिक्षक है और अधिकतर दिनों तक घर पर ही रहते हैं। शिकायत करने पर कोई सुनवाही नहीं होती बल्कि वही शिकायतकर्ता को धमकाते रहते हैं। अपनी ड्यूटी से लापरवाही करने वाले शिक्षकों पर भूतपूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवनचंद्र खंडूड़ी ने अपने मुख्यमंत्री काल में सख्ती बरती थी बाद में उन्हें इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा जिससे आप मैदानी इलाकों के इन शिक्षकों की मनमानी व दबदबे का अंदाजा लगा सकते हैं।