पौड़ी : उत्तराखंड में आए दिन जंगली जानवरों के हमलों से लोग डर के साए में जी रहे हैं लेकिन वन विभाग की तरफ से इसके प्रति ढुलमुल रवैया ही देखने को मिला। उनकी कार्यशैली को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। गढ़वाल वन प्रभाग की कार्यशैली को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी ने नाराजगी जताते हुए एक दिन का सांकेतिक धरना दिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कल्जीखाल ब्लॉक के डांगी गांव निवासी जगमोहन डांगी ने मंगलवार को डीएम कार्यालय परिसर में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। उनका कहना था कि गुलदार, भालू, बंदर और लंगूर के हमलों से ग्रामीण दहशत में हैं। कई जनपद में अनेकों लोगों की जान जा चुकी है और मवेशियों पर भी हमले हो रहे हैं।
डांगी ने आरोप लगाया कि विभाग जमीनी कार्रवाई के बजाय सांस्कृतिक आयोजनों में व्यस्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जंगली जानवरों के भय से उनके गांव का हाई स्कूल विगत छ माह से पंचायत भवन में संचालित हो रहा है।लेकिन गांव के जन जीवन के बीच छात्र-छात्राओं को पठन पाठन के लिए बेहतर माहौल नहीं मिला जिससे उनका बोर्ड परीक्षाओं में परीक्षा फल प्रभावित हो सकता है। ग्रामीण बंदरों और लंगूरों के आतंक से बहुत परेशान है। वृद्धों और बच्चों पर झपट्टा मार रहे हैं, जिस कारण ग्रामीण दहशत में है। यही कारण है कि उन्हें वन विभाग को जागने के लिए एक दिवसीय सांकेतिक धारणा देने को मजबूर होना पड़ा।
दांगी ने धरने के बाद जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया को ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी ने बताया कि इस मामले में डीएफओ गढ़वाल को निर्देश दिए गए हैं।
