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देहरादून : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत बैंक सखी बिजनेस कॉरस्पोंडेंस योजना का लाभ मातृ शक्ति को मिलने लगा है। पौड़ी जिले में योजना के तहत 278 महिलाओं को बैंकिंग सहित अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का प्रशिक्षण दिया गया है और सेवा उपलब्ध कराने के लिए उन्हें 22 ग्राहक सेवा केंद्रों की आईडी दी गई हैं। बैंक सखी गांव-गांव व घर-घर जाकर बैंकिंग सेवाएं मुहैया करवा रही हैं। इससे ग्राहकों को अपने ही घर पर लेन देन या खाते खोलने की सुविधा मिल रही है।
बैंकिंग कार्यों से बैंक सखियों की प्रतिमाह औसतन 8 से 10 हजार की आमदनी भी हो रही है। खास बात यह है कि सखियां बैंकिंग के अलावा कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से अन्य सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं। अक्सर बैंकों में लेन देन या अन्य कार्यों के लिए ग्राहकों की भीड़ होती है। इसके अलावा बैकिंग कार्य के लिए ग्रामीण क्षे़त्रों में ग्राहकों को काफी दूर जाना पड़ता है। इसे देखते हुए सरकार ने घर-गांव में ही बैकिंग सेवा उपलब्ध कराने की योजना बनाई। इसमें यह भी ध्यान रखा गया कि इससे महिलाओं को भी आर्थिक लाभ मिले, ताकि वे आत्मनिर्भर हो सकें। इसके लिए बैंक सखी योजना लाई गई और एनआरएलएम को इसका जिम्मा दिया गया।
एनआरएलएम ने आरसेटी से महिलाओं को बैकिंग प्रशिक्षण दिलवाने के बाद IIBF (भारतीय बैंकिंग एवं वित्त संस्थान) द्वारा बिजनेस कॉरस्पोंडेंस का प्रमाण प़त्र दिलाया गया।
डीआरडीए के परियोजना निदेशक विवेक उपाध्याय ने बताया कि बैंक सखियों को अधिकृत बायोमीटिृक डिवाइस और माइक्रो एटीएम मशीन उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे बैंक सखियां डिजिटल ट्रांजैक्शन किया जा रहा है। बैंक सखियां बचत खाते खोलने, जमा, निकासी, एफडी, ऋण और धन प्रेषण काम कर रही हैं। इसके अलावा सीएससी के माध्यम से उपलब्ध करायी गयी आईडी के माध्यम से उनके द्वारा बीमा पंजीकरण, जन आरोग्य योजना पंजीकरण और केवाईसी सहित लगभग कई सेवाओं का संचालन किया जा रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत ने बताया कि 110 महिलाओं को पूर्व में प्रशिक्षण दिया गया है। 168 महिलाओं को हाल में ही प्रशिक्षण दिलाया गया है। बैंक सखी के माध्यम से अभी तक 95 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वे इस योजना से गांव में ही रह कर आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर हैं।
