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उत्तराखंड भू कानून संघर्ष समिति दिल्ली द्वारा एक दिवसीय

सांकेतिक धरना प्रदर्शन–स्थानीय आयुक्त को उत्तराखंड के

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली: मंगलवार 7 दिसम्बर 2021 को उत्तराखंड भू कानून संघर्ष समिति दिल्ली एनसीआर द्वारा उत्तराखंड आयुक्त कार्यालय पर एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। जिसमें उत्तराखंड में जमीनों की हो रही खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने एवं पड़ोसी राज्य हिमाचल की तरह उत्तराखंड में भी सख्त भू कानून बनाए जाने की मांग को लेकर स्थानीय आयुक्त के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रेषित किया गया।

उत्तराखंड भू कानून संघर्ष समिति द्वारा मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश सरकार द्वारा भू सुधार कानूनों में संशोधन करके राज्य में भूमि खरीद की असीमित छूट दे दी गई है इससे राज्य के किसान भूमिहीन हो रहे हैं जिससे स्थानीय नागरिकों में काफी रोष है। समिति का कहना है कि सरकार द्वारा भूमि खरीद की असीमित छूट दिए जाने से पिछले कुछ वर्षों में बाहरी लोगों द्वारा जमीनों की खरीद-फरोख्त की जा रही है जिसके कारण प्रदेश की संस्कृति सभ्यता आदि को भारी खतरा होने की आशंका के चलते आज स्थानीय लोग अपनी जमीन में चौकीदारी करने को मजबूर हो रहे हैं।

ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखंड की सामाजिक सांस्कृतिक एवम मूल अवधारणा को बनाए रखने हेतु संघर्ष समिति उत्तराखंड की जनता की ओर से हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू संरक्षण कानून बनाए जाने व तुरन्त प्रभाव से 2018 का कानून रद्द करने की मांग करती है।

बता दें कि संघर्ष समिति पिछले कुछ महीनों से इस विषय पर पर जनता के बीच जाकर हस्ताक्षर अभियान भी चलाये हुए थी जिसमें उन्हें जनता का भरपूर सहयोग भी मिला। अब उत्तराखंड का हर व्यक्ति चाहता है कि उन्हें प्रदेश में एक शशक्त भू कानून मिले ताकि उनकी भूमि पर कोई नाज़ायज़ अतिक्रमण न कर सके और युवा रोजगार पूरक कृषि कर प्रदेश की उन्नति में अपना सहयोग दे सके। 

इस मौके पर धरना देने वालों में उत्तराखंड भू कानून संघर्ष समिति के अलावा दिल्ली में कार्यरत उत्तराखंड की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं,पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं,ने अपनी सहभागिता की।