PANDAV LEELA :
अज्ञातवास के समय पांडवों ने उत्तराखंड में काफी समय बिताया था और वे यहां की संस्कृति में इतना रच बस गए थे कि आज भी लोग उनकी याद में जगह जगह पांडव लीलाओं द्वारा उन्हें जीवंत किये हुए हैं। जनपद चमोली के सुदूरवर्ती किरसाल गांव जिसे छोटी पौड़ी के नाम से भी जाना जाता है में 23 वर्षों के बाद 25 दिसंबर से पांडव लीला का आयोजन हो रहा है। इस आयोजन को देखने के लिए क्षेत्र के हज़ारों लोग गांव में एकत्रित हो रहे हैं और पांडव लीला का आनंद उठा रहे हैं। 

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पांडव लीला किरसाल गांव जनपद चमोली





मंगलवार को गांव में चक्रव्यूह भेदन का मंचन हुआ जिसे देखकर लोग भावुक हो गए। पूरा गांव ढोल दमाऊं की थाप और पंडवाणी गायन से गूंजने लगा। दर्शक कलाकारों के बेहतरीन अभिनय से अभिभूत हैं।  

पांडव लीला समिति के अध्यक्ष विजय चौहान व पांडव लीला के डायरेक्टर जयबीर चौधरी ने बताया कि कई बार पांडव लीला के आयोजन पर विचार हुआ लेकिन किन्हीं कारणों के कारण आयोजन नहीं हो सका। लेकिन इस बार ईश्वर कृपा और क्षेत्र व गांव की तेवतुल्य जनता के सहयोग से यह आयोजन हो सका। अब पांडव लीला के तहत 3 जनवरी को जलयात्रा, 4 जनवरी को गैंडा वध, 5 जनवरी को शांति पाठ, महायज्ञ व ब्रह्मभोज के साथ लीला संपन्न होगी। 

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य समीर मिश्रा ने कहा कि जिस तरह से आयोजन समिति पांडव लीला द्वारा अपनी संस्कृति को बचाने का सफल प्रयास कर रही है उसके लिए वो बधाई की पात्र है। उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों को शुभकामनायें दी। वहीं उत्तराखंड व्यापार मंडल के प्रदेश मीडिया प्रभारी टीका मैखुरी ने इस सुंदर आयोजन के लिए आयोजन समिति और गांव के लोगों का आभार जताया। उन्होंने व  राजेंद्र सगोई ने पांडवों से आशीर्वाद लिया।  

चक्रव्यूह मंचन देखने के लिए नौटी, पुनगांव, विस़ोंणा, देवलकोट, गिंवाड, ऐरोली, बैनोली, नंदासैण व आली  के अलावा अन्य गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे।