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जोशीमठ को भविष्य में अब उसके प्राचीन नाम ज्योतिर्मठ से जाना 

जायेगा-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की घोषणा


गोपेश्वर : शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली जिले के नंदानगर (घाट) में आयोजित भाजपा की विजय संकल्प रैली में कहा कि जोशीमठ को अब उसके प्राचीन नाम ज्योतिर्मठ से जाना जायेगा। ऐसा माना जा रहा है कि चुनावों को देखते हुए इसके जरिये सीएम धामी ने राज्य के पुरोहित और ब्राह्मण समाज को खुश करने की कोशिश की है।

जोशीमठ का प्राचीन नाम था ज्योतिर्मठ

कहा जाता है की 8 वीं सदी में आदिशंकराचार्य ने हिन्दू धर्म के प्रचार प्रसार के लिए एक स्थान पर शहतूत के पेड़ के नीचे बैठकर कठोर तप कर  दिव्य ज्ञान की प्राप्ति की थी और इस स्थान को एक मठ के रूप में स्थापित किया जो वैदिक शिक्षा तथा ज्ञान का केंद्र रहा। यह स्थान बाद में ज्योतिर्मठ के रूप में जाना गया इसके बाद शंकराचार्य ने तीन और मठों की स्थापना की। ज्योतिर्मठ का नाम बाद में अपभ्रंश होकर जोशीमठ हो गया। ज्योतिर्मठ समुद्रतल से लगभग छह हजार फिट की ऊंचाई पर स्थित है और इसे बद्रीनाथ का द्वार भी कहा जाता है। यहां पर धोली गंगा और अलकनंदा का संगम भी होता है।  इस शहर से जुडी कही पौराणिक मानयताएं भी है।  कहा जाता है कि जब हिरणकश्यप ने प्रह्लाद को मारने की लिए होलिका का सहारा लिया तो भगवान् विष्णु काफी क्रोधित हो गए और उन्होंने नरसिंह रूप धारण कर हिरणकश्यप का सीना अपने नाखूनों से चीर कर उसका बध कर दिया लेकिन उनका क्रोध शांत होने का नाम नहीं ले रहा था ऐसे में मां लक्ष्मी ने प्रह्लाद से अनुरोध किया कि वो भगवान विष्णु को मनाये तब प्रह्लाद ने विष्णु का जाप किया जिससे उनका क्रोध शांत हुआ इसलिए कहते हैं कि इस स्थान पर नरसिंह का शांत स्वरुप दिखाई देता है।

स्थानीय लोगो की थी यह मांग

जोशीमठ को हिन्दुओं की धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है इसलिए स्थानीय लोग काफी समय से ये मांग कर रहे थे कि जोशीमठ का नाम बदलकर उसका  प्राचीन नाम ज्योतिर्मठ किया जाए लेकिन उनकी इस मांग पर पिछली किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। लेकिन घाट का नाम नंदा नगर करने से स्थानीय विधायक और  लोगों ने दवाब बनाया और चुनावी वर्ष को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनकी  भावनाओं का सम्मान करते हुए जोशीमठ को ज्योतिर्मठ करने की घोषणा की।