देहरादून के शहीद स्मारक पहुंच गढ़वाल हितैषिणी सभा दिल्ली के 

शिष्टमंडल ने राज्य आंदोलनकारी शहीदों को किया याद 

देहरादून : उत्तराखंड आंदोलन को भरपूर जनसमर्थन मिलता देख उस समय की उत्तरप्रदेश सरकार बेहद दवाब में थी और वो इस आंदोलन को किसी भी कीमत पर ख़त्म करना चाहती थी।  उसने उत्तराखंड में खटीमा और मंसूरी में हो रही विशाल जन रैली पर पुलिस द्वारा बिना चेतावनी के गोलीबारी करवाकर अपने मनसूबे दिखाने का प्रयास किया किंतु पृथक राज्य की मांग के लिए उठ रही चिंगारी इसके बाद पूरे उत्तराखंड में आग की तरह फ़ैल गई थी। इस हत्याकांड के 6 साल बाद सन 2000 में लोगों को उत्तरप्रदेश से पृथक उत्तराखंड राज्य मिला। अपने इन वीर बलिदानियों की याद में आज भी उत्तराखंडी 1 और 2 सितंबर को काला दिवस के रूप में मनाते हैं और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 

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देहरादून में भी शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है। 2 सितंबर को दिल्ली से गढ़वाल हितैषिणी सभा का एक शिष्टमंडल अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट जी की अगुवाई में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के शहीद स्मारक पहुंचा जहां उन्होंने  1 व 2 सितंबर 1994 को खटीमा और मंसूरी में तत्कालीन  मुलायम सिंह सरकार द्वारा गोली कांड में शहीद हुए आंदोलनकारियों  को अपने श्रृद्धासुमन अर्पित कर अपने उद्गगार व्यक्त किए। साथ ही  उस सभा में ये भी तय हुआ कि उत्तराखंड की बेहतरीन स्थिति के लिए सभी समाजिक संगठनों को संगठित होकर मिलकर काम करना होगा।




तत्पश्चात गढ़वाल हितैषिणी सभा के शिष्टमंडल ने भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जी से भेंट कर उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी। उसके बाद ये शिष्टमंडल अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम जिसमें कि मोबाइल होस्पिटल की मुहीम को लेकर स्वास्थ्य मंत्री धन सिह रावत जी से भेंट की और उनको चल अस्पताल के विषय में विस्तार से बताया और मंत्री जी को एक ज्ञापन सौंपा। सभा के अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट ने दोनों नेताओं को शुभांकर भेंट किया। 

इस शिष्टमंडल में सभा के अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट जी के साथ सह कोषाध्यक्ष अनिल पंत सलाहाकार श्री रविन्द्र चौहान व समाज सेवक श्री गणेश चन्द्रा शामिल रहे ।

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