ना हो पलायन, ना रहे अंधेरा-गैरसैंण राजधानी से होगा सवेरा, गैरसैंण स्थाई राजधानी के लिए आंदोलन हुआ तेज दिल्ली के बाद देहरादून के परेड ग्राउंड में 12 अक्टूबर को होगा शांतिपूर्ण धरना





देहरादून :
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग चरम पर है। इसको लेकर पहाड़ से शहर तक, उत्तराखंड के लोग पूरे जोश और जनसमर्थन के साथ सड़कों पर उत्तर रहे हैं। सब जगह बस एक ही आवाज गूंज रही है पहाड़ का सम्पूर्ण विकास तभी, स्थायी राजधानी गैरसैंण बने अभी। 

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स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति” ने दिल्ली में आयोजित सफल धरना प्रदर्शन के बाद अब 12 अक्टूबर को देहरादून के परेड ग्राउंड में शांतिपूर्ण और संविधानसम्मत धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस प्रदर्शन में पर्वतीय क्षेत्रों के अलावा शहरों और महानगरों से उत्तराखंडी लोग भारी संख्या में सम्मिलित होंगे। 

समिति के मुख्य संयोजक श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी (पूर्व IAS एवं पूर्व सचिव, उत्तराखंड सरकार) ने बताया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा के लिए है। गैरसैंण कोई भौगोलिक स्थान नहीं, यह उत्तराखंड की पहचान है। इस धरती की अस्मिता, न्यायपूर्ण विकास और पहाड़ की पीड़ा से जुड़ी हुई भावनात्मक राजधानी है। 




आंदोलन के दिल्ली संयोजक श्री देवेंद्र कुमार रतूड़ी ने बताया कि दिल्ली, एनसीआर और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से हजारों लोग इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होंगे।

समिति के वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया रणनीतिकार श्री देवेन एस. खत्री ने कहा गैरसैंण की मांग किसी राजनीतिक बयान से आगे है, यह जन-चेतना का स्वर है। आज समय है कि हम विचार, कलम और संगठन से मिलकर एक नई दिशा तय करें। गैरसैंण स्थायी राजधानी बनना अब जनादेश का रूप ले चुका है।

उन्होंने कहा कि आंदोलन को “आधुनिक रणनीति और पारदर्शी संवाद” के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा ताकि युवाओं, महिला समूहों और प्रवासी उत्तराखंडियों की भागीदारी अधिक से अधिक हो।










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