नींबू की खटाई


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आज मुझे मित्र आदरणीय चंद्र सिंह रावत जी ने व्हाट्सअप से पहाड़ी नींबू के विषय में याद दिलाया और नींबुओं के साथ अपनी फोटो भी शेयर की। जिसे देखकर गांव 
में नींबू से बनने वाली खटाई का स्वाद याद आ गया । 

उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में सर्दी के मौसम में माल्टा और नींबू बहुतायत मात्रा में होता है। ये दोनों ही खाने में बहुत ही रसीले होते है साथ ही दोनों में विटामिन सी पाया जाता है जो कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है  जिन लोगों को अधिक प्यास लगती है, उल्टियाँ होती है, कमजोर पाचन शक्ति है, खाँसी है, श्वास लेने में परेशानी है तथा पेट में कीड़े है, तो पहाड़ी नींबू उनके लिए बेहद लाभदायक है। इसके अलावा यह लिवर को भी ठीक रखता है और मोटापा भी कम करता है। 

किसी जमाने में उत्तराखंड के गांवों यह बहुतायत मात्रा में पाया जाता था और सर्दियों में लोग इसकी कहते का आनंद लिया करते थे किंतु गांवों से लोगो के पलायन के साथ साथ रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला यह बेसकीमती फल भी अब गिनती के गांवों में ही देखने को मिलता है। पलायन कर चुके लोग आज भी इसकी खटाई और सना के स्वाद को नहीं भूले हैं जब भी मौका मिलता है वे किसी भी कीमत पर इस स्वाद को फिर से पाना चाहते हैं। 




सर्दियों के मौसम में गांवों में खेत खलिहान का काम कम होता है ऐसे में लोग दिन की धूप में एक साथ बैठकर नींबू और माल्टे की खटाई बनाकर न केवल अपने स्वस्थ्य को दुरस्त रखते हैं बल्कि इसी बहाने एक-दूसरे के सुख दुःख को भी आपस में बांटते हैं। इसे बनाने का सबका अपना अपना तरीका है कोई इसमें भांग के बीज और जीरे को पीस कर गुड़ और नमक मिलाकर सना के रूप में खाता है तो कोई माल्टे के साथ नींबू को छीलकर उसमें घर का पिसा नमक चीनी या गुड़ मिलका कर खाता है। इस तरह इसका स्वाद खट्टा-मीठा हो जाता है जिससे ये खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है। इसके अलावा आप इसके रस को सब्जियों व सलाद में डालकर उनके स्वाद को बढ़ा सकते हैं और इसका अचार भी बना सकते हैं। कुल मिलाकर आप इसे कैसे भी सेवन करें ये आपके स्वस्थ्य को दुरस्त रखेगा। 




नींबू , गलगल, लिम्बा, कागजी नींबू की ही एक प्रजाति है।  इसका फल बड़ा, अंडाकार और मोटे छिलका लिए चमकदार और खट्टापन लिए होता है। यह अधिकतर उष्ण घाटियों में पाया जाता है। नींबू के गुणों को देखते हुए इसकी उपयोगिता जीवन में बहुत अधिक है। भारत सहित अधिकांश देशों में भोज्य पदार्थों में इसका प्रयोग किया जाता है।  

द्वारिका चमोली (डीपी)