पिथौरागढ़





पिथौरागढ़ में स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर
थल केदार 

उत्तराखंड को भगवान शिव का घर भी कहा जाता है और यही कारण है कि उनके अनेकों रूप इस धरती के अलग अलग स्थानों पर विराजमान हैं जहां पर इनके मंदिर बने हुए हैं । उनके इन्ही रूपों के दर्शन करने देश विदेश से लोग आते हैं और मनवांछित फल पाकर भावविभोर होते हैं। भगवान शिव का ऐसा ही एक मंदिर पिथौरागढ़ में थलकेदार पहाड़ी के किनारे पर स्थित है, जिसे थलकेदार शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है | 

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

हिमशिखरों और बृहंगम दृश्यों के बीच यह महत्वपूर्ण तीर्थ थलकेदार मंदिर पिथौरागढ़ शहर से लगभग 16 किमी की दूरी पर समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊंचाई  पर स्थित है । बहुत ही प्राचीन मंदिर होने के कारण यह अद्भत मंदिर विश्वास,आस्था और भक्ति का केंद्र भी है|धार्मिक पहचान के प्रतीक इस तीर्थस्थल में विराजमान शिवलिंग की प्रसिद्धि विश्वभर में है।  माना जाता है कि यह शिवलिंग करीब 1000 मिलियन वर्ष पुराना है । धार्मिक स्थान होने के साथ साथ यह पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत ही खूबसूरत और उपयुक्त स्थान है। स्कंदपुराण में भी इस स्थल का वर्णन मिलता है जिससे इसकी पौराणिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।


सरयू और श्यामा (काली) नदी के बीच सथाकिल पर्वत था जिसे आज थल केदार के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि यहां पर विधिवत पूजा अर्चना करने से केदारनाथ में पूजा करने के समान ही फल मिलता है।

एक किवंदती है कि इस क्षेत्र के एक किसान की गाय अन्य गायों की तुलना में प्रतिदिन चारा चरने जाती थी किंतु वापसी में घर देर से पहुंचा करती थी । इस पर किसान को संदेह हुआ और इसका कारण जानने के लिए उसने एक दिन गाय का पीछा किया और देखा कि गाय तो थलकेदार शिखर की ओर जा रही है और वहां पहुंचकर एक नवोदित शिवलिंग को अपने दूध से स्नान कराती है । अब किसान को गाय के देर से आने का कारण समझ आ गया। किसान के माध्यम से यह बात पूरे इलाके में फैल गई और ग्रामीणों ने उस स्थान पर शिव मंदिर स्थापित करने का निर्णय लिया । इस तरह थलकेदार पर्वत पर शिव मंदिर स्थापित किया गया जिसे वर्तमान समय में थलकेदार शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है | इस मंदिर के बारे में यह मान्यता है कि जो भी भक्त इस मंदिर में आकर सच्चे मन से मनोकामना करता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है |

आप मोटर मार्ग से बस, टैक्सी लेकर पिथौरागढ़ आकर  “बराबे मार्ग” के पास “कथ्पटिया” नामक स्थान से घने जंगलो से होते हुए लगभग 5 या 6 कि.मी. पैदल चलकर इस पौराणिक व खूबसूरत “थलकेदार शिव मंदिर” पहुँच सकते है|हिंदू पर्व महाशिवरात्री के अवसर पर यहां हर वर्ष भव्य मेले का आयोजन होता है जो कि बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करता है और इस अवसर पर दूर-दूर से लोग भगवान थलकेदार के दर्शनों के लिए आते हैं। 




थलकेदार शिव मंदिर से आपको लगभग 700 किमी की दूरी तक के अत्यधिक सुंदर हिमशिखरों का अवलोकन कर सकते है, जिसमें बद्रीनाथ, त्रिशूल, नंदादेवी, पंच-चाउली और एपी-नम्पा शामिल हैं ।

उत्तराखंड की ऐसी ही अन्य जानकारियों के लिए देखते रहें divyapahad.com पोर्टल और पोस्ट को शेयर कर अपने परिचितों को भी भेजें