सामाजिक कार्यकर्ता उमेश खंडूड़ी के विरोध के चलते कर्णप्रयाग में अवैध कब्जा होने से बचा 




कर्णप्रयाग
: पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड के दूर दराज के ग्रामीण इलाकों के जंगलों और गांवों के आस पास की जमीनों पर बाहरी व्यक्तियों द्वारा अवैध कब्जों की बाढ़ सी आ गई है। वहीं बाज़ारों में भी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ये अपनी सब्ज़ी व फल की रेहड़ियों को धड़ल्ले से लगा रहे हैं। ये कौन हैं और कहाँ से आये हैं कोई पूछने वाला नहीं। उत्तराखंड से लोग रोजगार के लिए शहरों की तरफ आ रहे और गांव खाली होते जा रहे हैं जिसका फायदा उठा ये लोग जंगलों के अंदर ढांचा तैयार कर जमीन को कब्ज़ा रहे है। कुछ स्थानों पर तो इनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई कि प्रशासन की मिली भगत से गांव की जमीनों पर कब्ज़ा करके गांव वालों के रास्ते ही बंद कर रहे हैं। 

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अभी हाल की घटना चमोली जिले के कर्णप्रयाग बाजार की है यहाँ छुटमलपुर से आये कुछ लोगों ने बिना परमिट के ही बीच सड़क में कब्ज़ा कर फल की दुकान लगा दी। उनके इस तरह कब्जे को सबने देखा लेकिन कोई भी स्थानीय व्यक्ति उनका विरोध न कर सका। 




सामाजिक कार्यकर्ता उमेश खंडूड़ी
ने बताया कि जब उन्हें पता चला तो वो मौके पर वहां पहुंचे तो ये देख कर हैरान रह गए कि इस कब्जाधारी  को वहां से हटाने के बजाय नगर पालिका ने उनकी रशीद काट कर एक तरह से रेहड़ा लगाने की अनुमति दे दी। छुटमलपुर से यहां आकर कब्जा करने वाले का हमने पुरजोर विरोध किया और 10 मिनट के अंदर अंदर उसे वापिसी की राह पकड़ा दी। हमने प्रण लिया हुआ है कि हम स्थानीय लोगों के रोजगार को ख़त्म नहीं होने देंगे और इस तरह के अतिक्रमण करने वालों का विरोध करते रहेंगे। लेकिन स्थानीय लोगों को भी इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा।