अपनी अनुपम ख़ूबसूरती से पर्यटकों को लुभाता गढ़वाल कुमाऊं के बीच स्थित ग्वालदम 

जब जब उत्तराखंड की बात होती है तो एकाएक वहां के दर्शनीय पर्यटक स्थल आंखों के आगे घूमने लगते है। ऐसे ऐसे दर्शनीय स्थल है कि आप एक बार देख लो तो मन बार बार जाने को लालायित रहता है। खूबसूरत हरी हरी मखमली बुग्याल बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां और कल कल करती नदियां हमें जीवन की आपा धापी से निकल भरपूर सकून  दे जीवन के वास्तविक आनंद का अहसास कराती है।  ऐसा ही एक पर्यटक स्थल जो गढ़वाल कुमाऊं को जोड़ने के साथ साथ वहां के जनमानस की भावनाओं को भी जोड़ने का काम करता है और वो छोटा सा शहर है ग्वालदम ।  

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चमोली जिले में स्थित ग्वालदम ब्रिटिश काल में अग्रेजों की पसंद में शुमार रहा था । इसकी खूबसूरती को देखते हुए उन्होंने 1890 में यहाँ पर एक गेस्ट हाउस का निर्माण किया जो वहां अब भी मौजूद है और उसी  के एक किनारे खूबसूरत झील बनी है। ब्रिटिश वॉयसराय लार्ड कर्जन ने यहाँ से रूपकुंड और तपोवन के लिए 200 किलोमीटर लम्बा लार्ड कर्जन ट्रैक भी तैयार किया था जो ट्रैकर को काफी लुभाता है। पर्यावरणविद और पद्म सम्मान से सम्मानित कल्याण सिंह रावत जी ने सन 1994  में मैती आंदोलन की शुरुआत यही से की थी। शोर शराबे से दूर छोटी छोटी झीलों हिमालय के विहंगम दृश्यों और देवदार के घने जंगलों से घिरे प्रकृति की यह अनोखी छटा स्वर्ग से कम नहीं लगती। 

ग्वालदम के आकर्षण 

प्राचीन काल में ग्वालदम आलू और सेब की मंडी हुआ करता था। यह समुद्रतल से लगभग 1940 मीटर की ऊंचाई पर है और नंदा देवी, त्रिशूल, नंदा घुंघुटी जैसी हिमालयी चोटियां यहां के आकर्षण का केंद्र है।  ग्वालदम कौसानी से मात्र 40 किलोमीटर,  वैजनाथ से 22 किलोमीटर और कर्णप्रयाग से लगभग 68 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है देवदार के वृक्षों से घिरा यह स्थान पर्यटकों को अपनी और लुभाता है। क्योंकि पर्यटकों को यहाँ  घूमने के लिए बहुत से रोचक स्थान व धार्मिक आस्था के प्रतिक मंदिर मिल जायेंगे जिनमें  बदंगारी, ग्वाल्दम नाग, अंगीरी महादेव, मची ताल,बुद्धा मंदिर, पिंडार की नदी आदि प्रमुख हैं। ग्वालदम का अटल आदर्श ग्राम लम्बा ग्वालदम मुख्य बाजार से केवल 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जहां का प्राचीन डाकघर और चाख खान ( चाय का कारखाना) बहुत ही प्रसिद्ध थे। यही नहीं यहां से लगभग 10  किमी की दूरी पर देवी भगवती का प्राचीन और ऐतिहासिक बधाणगढ़ी मंदिर भी है यह मंदिर गढ़वाल और कुमाऊं के लोगों के बीच अगाध आस्था का केंद्र है। ऐतिहासिक दृष्टि से प्राचीन काल में यह गढ़वाल और कुमाऊं राजाओं के बीच विवाद का कारण भी रहा है। 

स्वास्थ्य और शिक्षा की बुनियादी सुविधाएं 

थराली ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले इस छोटे से शहर में आपको प्रकृति के अलावा शिक्षा एवं स्वास्थ्य के बुनियादी साधनो में  सेंट्रल स्कूल, गवर्नमेंट इंटर कॉलेज, गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल, विद्या-मंदिर, शिशु-मंदिर और अन्य अध्ययनों के लिए कोचिंग सेंटर भी  उपलब्ध हैं। इसके अलावा कृषि-विज्ञान केंद्र, पशुपालन, सरकारी ऐलोपैथी अस्पताल, पशु चिकित्सा केंद्र, फल प्रसंस्करण केंद्र, वन रेस्ट हाउस, जीएमवीएन पर्यटक विश्राम गृह, स्टेट बैंक, चमोली जिला सहकारी बैंक शाखा व यहां पर्यटकों को ठहरने के लिए गढ़वाल पर्यटक मंडल के गेस्ट हाउस के अलावा प्राइवेट होटल भी उपलब्ध हैं। 

कैसे पहुंचे 

यहाँ पहुँचने के लिए सबसे निकटतम हवाई अड्डा पंत नगर है  जो कि ग्वालदम से लगभग 250 किमी की दूरी पर है।

सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

ग्वालदम चारों तरफ से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। यह कौसानी से 40 किमी की दूरी पर, बैजनाथ से 22 किमी, बागेश्वर से 45 किमी नैनीताल से 149 किमी और कर्णप्रयाग से लगभग 68 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

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