निरंतर गढ़वळि भाषा का संवर्धन का वास्ता सब्यूँ नै पीढ़ी थैं ऐथर आण व ल्याण चयेंद । भौत सा कवि अर गितारौं कु नौं शामिल नि कयूँ पर निश्वार्थ भौ से कार्य परें लग्यां राला । जय बद्री केदार बाबा जय माँ भगवती नंदा । जय भारत ।।

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