Supreme Court decision




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नई दिल्ली :
नजफगढ़ की दामिनी (किरन नेगी) की गैंग रेप के बाद हत्या मामले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए दामिनी के माता पिता और कई सामाजिक संगठनों ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस फैसले से दामिनी के माता पिता को गहरा आघात लगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में दिल्ली के छावला इलाके में 19 साल की लड़की की गैंग रेप के बाद हत्या मामले में मौत की सजा पाए तीन दोषियों को बरी करने  के अपने फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिकाओं को ख़ारिज करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस रविंद्र भट्ट और जस्टिस बेला एम त्रिपाठी ने कहा कि इस केस में अदालत की तरफ से पारित निर्णय में कोई तथ्यात्मक या कानूनी त्रुटि नहीं दिखती इसलिए इस पर समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं उठता । 



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बता दें कि 2012 में नजफगढ़ के छावला इलाके में रहने वाली उत्तराखंड मूल की 19 वर्षीय लड़की का कुछ लड़कों ने अपहरण कर सामूहिक बलत्कार के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। इस मामले में तीन लड़के दोषी पाए गए थे जिन्हें दिल्ली की निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी।  इसके बाद हाई कोर्ट ने भी उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा था। लेकिन आरोपियों ने सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2022 को इस केस में पुलिस की जांच और ट्रायल पर सवाल खड़े करते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ  देते हुए बरी कर दिया था। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली पुलिस और पीड़ित परिवार के अलावा कई सामजिक संगठनों ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। उनकी इस मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इस फैसले में कोई खामी नज़र नहीं आती इसलिए इसे खारिज किया जाता है। 



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