दिल्ली/एनसीआर : उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति द्वारा उत्तराखंड स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार 16 नवम्बर 2025 (रविवार) को ई-ब्लॉक सीडीएस जनरल बिपिन रावत पार्क, रामलीला मैदान परिसर, शिव मंदिर प्रांगण, राम पार्क विस्तार, लोनी (गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में एक भव्य एवं ऐतिहासिक सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया जायेगा।
यह समारोह उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपरा, भाषा और सामाजिक एकता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का प्रयास है। दिल्ली–एनसीआर में प्रवासी उत्तराखंडी समाज की एकता, पहचान और गौरव को सशक्त रूप देने के उद्देश्य से यह आयोजन सामाजिक व सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समिति का मानना है कि यह समारोह केवल एक सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि “अपनों को जोड़ने, अपनी जड़ों से जुड़ने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से परिचित कराने का एक माध्यम” है। समारोह में लोकनृत्य, लोकगीत, सांस्कृतिक झांकियाँ, सम्मान समारोह और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से उत्तराखंड की विविध परंपराओं का आकर्षक प्रदर्शन किया जाएगा।
आयोजन में उत्तराखंड क्रांति दल के श्री पूरण सिंह कठैत, केंद्रीय अध्यक्ष, उत्तराखंड क्रांति दल, श्री आशुतोष नेगी, केंद्रीय उपाध्यक्ष, उत्तराखंड क्रांति दल एवं रि. मेजर संतोष भंडारी, केंद्रीय अध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
साथ ही लोनी एवं दिल्ली–एनसीआर क्षेत्र के सम्मानित जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि और उत्तराखंड समाज के वरिष्ठ सदस्य इस आयोजन की शोभा बढ़ाएंगे।
उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति जयेन्द्र नेगी ने बताया कि समिति का उद्देश्य है कि उत्तराखंडी समाज जहाँ भी रहे, अपनी परंपराओं, बोली-भाषा और मातृभूमि से आत्मीय जुड़ाव बनाए रखे। इस आयोजन के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को नई ऊर्जा और पहचान प्रदान करने का संकल्प दोहराया जाएगा।
उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति पिछले 25 वर्षों से समाज सेवा, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक सहयोग के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है। किसी भी आपदा, संकट या सामाजिक कार्य में समिति ने सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।
समिति के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्यरत हैं। समिति की ओर से सभी उत्तराखंडी भाई-बहनों, समाजसेवियों, महिलाओं और युवाओं से अनुरोध है कि वे 16 नवम्बर 2025 को इस सांस्कृतिक पर्व में सपरिवार सम्मिलित होकर समाज की एकता और गौरव का हिस्सा बनें।