लोकभाषा से संस्कृति तक, नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का सार्थक अभियान सम्पन्न
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लोनी, गाजियाबाद : अलकनंदा कॉलोनी, इलायचीपुर, रामपार्क विस्तार, लोनी में संचालित लोकभाषा से संस्कृति तक, नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का सार्थक अभियान सम्पन्न। गढ़वाली एवं कुमाऊँनी लोक-भाषा शिक्षण कक्षाओं का 12वाँ सप्ताह पूर्ण होने के बाद 15 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुरस्कार वितरण एवं जलपान के साथ विधिवत समापन हुआ। कार्यक्रम में 48 बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस अभियान की घोषणा 5 जुलाई को उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति द्वारा आयोजित मेधावी छात्र उत्कृष्ट सम्मान समारोह में की गई थीलोकभाषा से संस्कृति तक, नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का सार्थक अभियान सम्पन्न

इस अवसर पर उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली के संरक्षक एवं DPMI दिल्ली के चेयरमैन डॉ. विनोद बछेती जी ने लोकभाषा को संस्कृति एवं पहचान की अमूल्य धरोहर बताते हुए पहल की सराहना की।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि शिवकुमार जी, नेहा जी, एडवोकेट दिनेश शर्मा जी एवं किशोर सती जी सहित बच्चों के अभिभावक एवं सहयोगी उपस्थित रहे।
गढ़वाली शिक्षिकाएँ हीरा पटवाल एवं सरिता रावत तथा कुमाऊँनी शिक्षिकाएँ नीमा रावत एवं कविता तिवारी ने समर्पित भाव से बच्चों को लोकभाषा का शिक्षण दिया। केंद्र प्रमुख मंजू उनियाल, सह-केंद्र प्रमुख पुष्पा सती तथा सहयोगी कार्यकर्ताओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस अवसर पर मीडिया प्रभारी जयेंद्र नेगी ने कहा कि “मातृभाषा हमारी संस्कृति और पहचान की आधारशिला है। नई पीढ़ी को अपनी लोकभाषा से जोड़ना हम सभी की सामाजिक जिम्मेदारी है।”
सह-मीडिया प्रभारी संगीता भट्ट ने सूचना, समन्वय एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जलपान की व्यवस्था संगीता भट्ट एवं रमेश सती के सहयोग से हुई।
इस अभियान के सफल संचालन के लिए डॉ. विनोद बछेती जी, सभी शिक्षिकाओं, बच्चों, अभिभावकों, सहयोगी कार्यकर्ताओं एवं उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
“लोकभाषा बचेगी, तो संस्कृति और पहचान सदैव जीवित रहेगी
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