पुण्यतिथि परैं याद करेगेन दिवंगत साहित्यकार प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

नई दिल्लीः उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली द्वारा 15 अगस्त,2026 खुणि आयोजित श्रधंजलि सभा म हिंदी व गढवाळी का बरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल तैं वोंकि दूसरी पुण्य तिथि परैं याद करेगे। गढ़वाल भवन पंचकुईया मार्ग म आयोजित श्रद्धांजलि सभा म कै साहित्यकार, पत्रकार, बड्थ्वाल कुटुंब का कै प्रतिनिधि अर समाजसेवी उपस्थित छाया। द्वी साल पैलि 15 अगस्त, 2024 खुणि अचाणचक प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल जी की हृदयगति रुकण से निधन ह्वे गे छौ। स्वर्गीय प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल जी कु जन्म 10 सितंबर 1964 कु सिराई, नजदीक डाडामंडी, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) मा ह्वे। वोंकी माता जी श्रीमती प्रभा बड़थ्वाल छन व पिताजी स्वर्गीय आनंदमणि बड़थ्वाल छाया। प्रतिबिम्ब जी ला स्नातक मेडिकल टेक्नोलॉजी बिटिन कैरि व वेका बाद लेखन कार्य का दगड़ी विदेश म रोजगार व निजी व्यवसाय करदा छाया।

दिवंगत प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल जी ला न सिर्फ भारत बल्कि दुबई समेत कै देशों म बि गढवाळी, कुमाउनी अर हिंदी भाषाओं को प्रचार-प्रसार कैरि। नब्बे का दशक म वूंला पाठ्यक्रम तैयार कैरिकी विदेश म भाषा शिक्षण कक्षाओं कु संचालन कैरि छौ। यूएई म 34 वर्षों बिटिन प्रवास कैरि नौकरी का बाद लगभग 20 वर्ष निजी व्यवसाय म हाथ आजमाई। स्वदेश औणा बाद बि बड्थ्वाल जी उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का दगड़ी लगातार भाषा आंदोलन तैं अगनै बढाणा छाया। ये का दगड़ी वो लेखन म बि लगातार लग्यां छाया। बड्थ्वाल जी कि प्रकाशित पुस्तक छन मेरा चिंतन (कविताएँ), मी टू (हिन्दी कहानियाँ) अर गढ़वळि म म्यार आखर : मेरि कविता एक गढ़वळि पोथी यखुली प्रकाशनाधीन च। 23 हिंदी पोथ्यों को डिजिटल प्रकाशन कैरि व कै हौरि पुस्तक बि लिखीं। कुल मिलैकि बड्थ्वाल जी लगातार भाषा साहित्य की साधना म लग्यां छाया।
श्रद्धांजलि सभा म बड्थ्वाल कुटुंब का सदस्यों, साहित्यकारों, पत्रकारों आदि ला भाग ले। जौं म बड्थ्वाल परिवार का राजकुमार बड्थ्वाल, प्रदीप बड्थ्वाल, प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल जी का अनुज प्रियबिम्ब बड्थ्वाल, रुद्राक्ष धस्माना, गढ़वाल हितैषिणी सभा का अध्यक्ष सूरत सिंह रावत, उपाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह नेगी, महासचिव पवन कुमार मैठाणी, सांस्कृतिक सचिव वीरेंद्र सिंह नेगी, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र चमोली, कार्यकारणी सदस्या रेनू उनियाल, सीमा गुसाईं, गोविंदराम भट्ट, धीरेन्द्र गुसाईं, बरिष्ठ साहित्यकार चन्दन प्रेमी, दीनदयाल बन्दूणी दीन, चन्दन प्रेमी, मदनमोहन थपलियाल, जयपाल सिंह रावत छिप्वडुदा, दर्शन सिंह रावत, उमेश बंदूणी , कवियत्री निर्मला नेगी, रमेश हितैषी, उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी, बृजमोहन वेदवाल, प्रदीप रावत खुदेड़ , संदीप गढ़वाली, द्वारिका प्रसाद चमोली, उदयराम ममगाईं राठी, रामचरण धस्माणा, नीरज बवाड़ी, मायाराम बहुगुणा, व्लॉगर सुभाष कुकरेती, बरिष्ठ रंगकर्मी खुशहाल सिंह बिष्ट, संगीता सुयाल, संतोष बडोनी, धर्मेंद्र प्रसाद, अंजू भंडारी, शशि बडोला, धर्मवीर रावत, रविंद्र रावत आदि उपस्थित छाया।

सब्बि वक्ताओं ल बोलि कि स्वर्गीय प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल जीन आजीवन साहित्य व समाजसेवा कैरि। यूएई म रैणा का बाद बि वोंन वख उत्तराखण्ड समाज तैं एकजुट कैरि। बच्चों तैं गढ़वालि, कुमाउनी,जौनसारी भाषा सिखौणा खातिर कक्षाओं कु आयोजन कैरि। हिन्दी भाषा की सेवा का खातिर बड्थ्वाल जी अखिल विश्व स्तर परैं कै साहित्य सेवी संगठनों का दगड़ि जुड्यां छाया। खासकर गढ़वाली, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली की पहल का बड्थ्वाल जी भौत प्रशंसक छाया। वोकु विचार छौ कि जब हमरी भाषा संविधानै आठवीं अनुसूची म आली तभी रोजगारपरक बणलि व तब ता हमरा बच्चा सीखला। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का एक प्रबल समर्थक व सहयोगी छाया प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल जी।
गढ़वळि – कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना विषय म उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी ल बताई कि हम लगातार भारत सरकार व उत्तराखण्ड सरकार तैं ज्ञापन/चिठ्ठी भेजणा छौ। अन्य माध्यमों से बि लगातार काम हूणा छन। लेकिन जनभागीदारी व सरकारों अर हमरा राजनेताओं का ही माध्यम से कुछ सार्थक होलु। यीं दिशा म लगातार जतन जारी छन। हमरि कोशिश च कि अगला साल विधानसभा चुनाव म हमरी भाषा एक मुद्दा हो व राजनैतिक दलों का घोषणापत्र म शामिल हो। यांका खातिर समाज तैं बि अगनै औंण पोडलु।

युवा कवि सन्दीप गढ़वाली ला स्वर्गीय प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल की जीवनी सब्यों का समणि राखि। वोंन बतै कि स्वर्गीय प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल जी ला गढ़वाली भाषा म लगभग तेईस कविता संग्रह अर कहानि संग्रह लिख्यां छन जु ई बुक का रूपम एमाजौन म छन। यांका अतिरिक्त वोंन कै कविता, कहानी, संस्मरण अर अपणि यादगार आदि तैं लिख्यों छ। जु कि अप्रकाशित छ।
उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी ल बोलि कि हमरि कोशिश रालि कि स्वर्गीय प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल जी की पावन स्मृति सदन्नि बणी रौ। यां का खातिर वों का परिजन अर बड्थ्वाल परिवार तैं बि अगनै आण पोड़लु। प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल जी कु अप्रकाशित साहित्य तैं निकट भविष्य म छपौणा जतन करण चयेंद। प्रियाबिम्ब बड्थ्वाल जी ला बोलि कि अगर भविष्य म बड्थ्वाल जी परैं मंच कुछ सार्थक पहल पुस्तक प्रकाशन आदि का विषय म करदा ता हम पुरू सहोयग करला। कार्यक्रम कु संचालन उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी ल कैरि।