उत्तराखंड के सामाजिक संगठन धाद द्वारा मातृभाषा सप्ताह का आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी भाषा से जोड़ने का प्रयास

देहरादून : उत्त्तराखण्ड का प्रमुख सामाजिक संगठन धाद प्रदेश की भाषाओं के पक्ष में 20 से 26 फरवरी तक मातृभाषा सप्ताह आयोजित करने जा रहा है। आयोजन की थीम नई पीढ़ी को उनकी मातृभाषा से जोड़ना है। आयोजन का सूत्रवाक्य दिया गया है अपनी भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाए और प्रदेश के सभी स्कूलों में यहां की भाषाओं को पढ़ाएं।

आयोजन की जानकारी देते हुए मातृभाषा एकाँश के प्रभारी शांति प्रकाश ने बताया कि धाद ने उत्त्तराखण्ड की भाषाओं के पक्ष में 1987 से पत्रिका गोष्ठियों और प्रकाशन के साथ व्यापक वातावरण बनाने की पहल की। यूनेस्को द्वारा मातृभाषा दिवस 21 फरवरी की घोषणा के बाद 2010 से हर वर्ष उत्तराखंड की मातृभाषाओं को दुनिया की तमाम छोटी भाषाओं की चिंता से जोड़ते हुए धाद हर वर्ष यह आयोजन करती है।
उन्होंने बताया कि इस बार का आयोजन नई पीढ़ी को उनकी दूधबोली से जोड़ने के निमित्त है। थीम के अंतर्गत धाद और रूम टू रीड द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के प्रतिनिधि स्कूल में मातृभाषा कहानी वाचन का आयोजन किया जाएगा।


जिसमें विभिन्न साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता अपने जिले के प्राथमिक स्कूल में उत्तराखण्ड की भाषाओं में कहानी सुनाने के साथ भाषायी संवाद करेंगे।
सप्ताह का शुभराम्भ 20 फरवरी को उत्तराखण्ड की भाषाओं के कहानी वाचन की कार्यशाला के साथ होगा।  इस अवसर पर मातृभाषाओं की कविताओं की पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा।
मातृभाषा सप्ताह 21 फरवरी से 26 फरवरी तक मातृभाषा की विभिन्न विधाओं कविता कहानी गीत के विशेषज्ञों के साथ ऑनलाइन लाइव सत्र आयोजित किये जाएंगे।

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