बहुत सुंदर विवरण।

सूचनार्थ लिखनु छौ की डंडरियाल जी को खंड काव्य बागी उपनै लड़ै प्रकाशित ह्वेगे । एक वास्ते भी आशीष, गिरीश सुंदरियाल आदि लोग प्रयास छौ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *