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देहरादून : प्रदेश सरकार सात हजार से अधिक ग्राम प्रधानों को कोविड काल वर्ष 2019-20 और 2020-21 में कोरोना वायरस से बचाव के लिए जरूरतमंदों की मदद के किए गए उनके कार्यों की एवज में प्रोत्साहन राशि देने की तैयारी कर रही है। । ग्राम प्रधान लगातार सरकार से प्रोत्साहन राशि की मांग करते आ रहे हैं। इस बावत अब पंचायतीराज निदेशालय की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव में हर प्रधान को 10 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की बात कही गई है। 

बता दें कि कोविडकाल के दौरान वर्ष 2019 से 2021 के बीच कोरोना वायरस से बचाव के लिए ग्रामीणों ने जरूरतमंदों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए थे। कोरोना से बचाव के लिए अनेकों गांवों में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए। जरूरतमंदों को भोजन, दवा एवं अन्य सुविधाएं मुहैया कराई गई, जिसमें सभी ग्राम प्रधानों ने अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाया, जिसका नतीजा है कि उत्तराखंड के गांव इस जानलेवा बीमारी से काफी हद तक बचे रहे। 




कोविड काल के बाद सरकार की ओर से ग्राम विकास अधिकारियों को प्रोत्साहन के रूप में 10-10 हजार रुपये की धनराशि दी गई, लेकिन ग्राम प्रधानों की भूमिका को नजरंदाज कर दिया गया। इसके बाद से ही ग्राम प्रधान लगातार सरकार से प्रोत्साहन राशि की मांग करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि गांवों में कोरोना वायरस से बचाव के लिए ग्राम प्रधानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दिन रात काम किया, लेकिन प्रोत्साहन राशि उन्हें न देकर वीडीओ को दे दी गई। 

पंचायतीराज निदेशालय के अधिकारियों के मुताबिक, ग्राम प्रधानों की मांग पर निदेशालय की ओर से प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। हमारी कोशिश है कि वीडीओ की तर्ज पर ही ग्राम प्रधानों को भी कोविड में किए गए कार्य के लिए प्रोत्साहन राशि दी जा सके, इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।




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