हमें अपनी भाषा और संस्कृति को अपनाकर अपनी जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ना होगा-डॉ. विनोद बछेती


नई दिल्ली : उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच एवं डीपीएमआई इंस्टिट्यूट ने रविवार 10 अगस्त को डीपीएमआई, न्यू अशोक नगर, दिल्ली के सभागार में गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया। इस कार्यक्रम में डीपीएमआई के चेयरमैन डॉ विनोद बछेती जी के संरक्षण से चलाई जा रही गढ़वाली कुमाऊनी भाषा की कक्षाओं के बच्चों ने नरेंद्र सिंह नेगी जी के गीतों में शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश कर सभागार में उपस्थित जन समूह को भाव विभोर किया। 

उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच के संयोजक दिनेश ध्यानी ने गढ़वाली कुमाउनी कक्षाओं के बच्चों, उनके शिक्षकों व अभिभावकों का अभिनंदन व स्वागत करते हुए डॉ विनोद बछेती, वरिष्ठ साहित्यकार चंदन प्रेमी, जयपाल सिंह रावत एवं दर्शन सिंह रावत इत्यादि के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।  


कार्यक्रम संरक्षक डॉ विनोद बछेती जी ने बच्चों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने नरेंद्र सिंह नेगी जी के गीतों की बात कर कहा कि हम उनके गीतों को सुनकर ही बड़े हुए हैं। नेगी जी की ये यात्रा 55 सालों से अनवरत चलती आ रही है। अगर किसी को गढ़वाली सीखनी है तो वो नेगी जी के गीतों को सुनकर ही सीख सकता है। उनके हर गीत में उत्तराखंड के अपेक्षा में कोई न कोई संदेश छिपा होता है। पर्यावरण के संरक्षण के लिए उन्होंने बहुत पहले अपने गीत न काटा न काटा तन डाल्युं तैं से लोगों को चेता दिया था। हमने उनसे प्रेरणा लेकर ही उनके जन्मदिवस को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाने और एक पेड़ लगाने का संकल्प लिया। बछेती जी ने कहा कि हमें अपनी भाषा और संस्कृति को अपनाकर अपनी जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ना होगा। इसी बात को ध्यान में रखकर हमने गढ़वाली कुमाउनी कक्षाओं का शुभारंभ किया था। इसमें हमें साहित्यकारों, बच्चों और उनके अभिभावकों का भरपूर सहयोग मिल रहा है, इसके लिए उनका हार्दिक आभार। 

अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु गुरुदेव आदरणीय अरुण योगी जी ने कार्यक्रम में पधार कर बच्चों को अपना आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बच्चे अपनी भाषा में धाराप्रभाव से बोल रहे हैं उसे देखकर मुझे भी लगा कि अब मुझे भी अपनी भाषा सीखनी चाहिए। गुरुदेव ने कहा कि डॉ. विनोद बछेती जी एक बहुत ही सराहनीय कार्य कर रहे हैं और हम चाहेंगे कि उनके साथ मिलकर इस कार्य को आगे बढ़ाएं। मैं कोशिश करूँगा कि हमारे मिशन से जुड़े बच्चे भी अगले साल से देवलोक की भाषा को सीखें। 


कार्यक्रम में गढ़वाली कुमाउनी कक्षाओं के करीब करीब 12 सेंटरों के बच्चे, उनके अभिभावक, साहित्यकार चंदन सिंह प्रेमी, जयपाल सिंह रावत, दिनेश ध्यानी, सुशील बुडाकोटी शैलांचली, जगमोहन सिंह रावत जगमोरा, दर्शन सिंह रावत, गिरधारी रावत, ओम प्रकाश आर्य, शशि भदोला, द्वारिका प्रसाद चमोली, सुशील सेमवाल, गढ़वाल हितैषिणी सभा के पूर्व अध्यक्ष  अजय सिंह बिष्ट, अनिल पंत, अर्जुन सिंह राणा, दिगपाल कैंतुरा, दयाल सिंह नेगी, हरीश असवाल, संयोगिता ध्यानी, शिक्षिका, कवियित्री राखी बिष्ट, ज्योति डंगवाल, रेनू जखमोला उनियाल, अंजू पुरोहित,  वरिष्ठ पत्रकार दाताराम चमोली, सुभाष गुसाईं, प्रताप थलवाल, दीपक डंडरियाल, प्रताप सिंह नेगी, मदन भंडारी, मास्टर दिनेश चंद्र जोशी, हरीश लिंगवाल, सुरवीर बर्तवाल, कुंदन सिंह भैसोड़ा, जितेंद्र देवलियाल सहित असंख्य लोग मौजूद रहे। 

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